बदतमीजी का मुंह तोड़ जवाब देना है जरूरी, साइंस ने भी माना सुकून और आत्म-विश्वास के लिए है फायदेमंद
अगर कोई बदतमीजी करे, तो सही वक्त पर सही जवाब देना आपकी मेंटल हेल्थ के लिए काफी जरूरी है। ...और पढ़ें

ईंट का जवाब पत्थर से देना है जरूरी (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमें अक्सर यही सीख दी जाती है कि कैसी भी परिस्थिति हो हमेशा शांत रहना चाहिए, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि किसी बदतमीज इंसान को करारा जवाब देने के बाद आपको एक अजीब सा सुकून मिलता है? यह महज इत्तेफाक नहीं है।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च में पाया है कि जब बात आत्म-सम्मान की हो, तो जैसे को तैसा व्यवहार न केवल सामाजिक रूप से मान्य है, बल्कि आपकी मानसिक सेहत के लिए भी जरूरी है। यानी अगर कोई आपके साथ बदतमीजी कर रहा है, तो उसे सही जवाब देना आपकी मेंटल हेल्थ और आत्म-सम्मान दोनों के लिए फायदेमंद है।
क्या कहती है यह रिसर्च?
इस रिसर्च में 850 प्रतिभागियों पर किए गए पांच अलग-अलग प्रयोगों से यह पता चला है कि हमारा दिमाग अपमान को एक सीधे खतरे की तरह देखता है। जब कोई आपके साथ गलत व्यवहार या बदतमीजी करता है, तो पलटकर जवाब देना समाज की नजर में नैतिक और न्यायसंगत माना जाता है।
लोग उस गलत बर्ताव को स्वीकार कर लेते हैं जो किसी दूसरे के गलत बर्ताव के जवाब में किया गया हो। यह सामने वाले को यह बताने का एक तरीका है कि उसने सीमा लांघी है, जो सामाजिक दृष्टिकोण से भी जरूरी है।
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मानसिक सेहत और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी
शोध के अनुसार, सही समय पर कड़ा जवाब देने से न केवल तनाव कम होता है, बल्कि यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है। लॉस एंजिलिस काउंटी म्यूजियम ऑफ आर्ट की एक स्टडी में पाया गया कि गलत बर्ताव का सही तरीके से सामना करने से व्यक्ति का आत्मविश्वास और इमोशनल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है। मेंटल हेल्थ वर्कर्स पर हुए रिसर्च बताते हैं कि असभ्य लोगों से निपटने की कला सीखने से भविष्य का तनाव कम होता है और प्रोफेशनल ग्रोथ में मदद मिलती है।
सामाजिक नियमों की रक्षा और दिमागी वायरिंग
हमारा दिमाग इस तरह बना है कि वह अपमान को एक खतरे के रूप में पहचानता है और डिफेंसिव रिएक्शन देने के लिए प्रेरित करता है। पलटकर जवाब देने को केवल बदला नहीं, बल्कि सामाजिक नियमों की रक्षा करना माना जाता है।
एक रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि अगर आपका रूखा जवाब बदले की भावना से नहीं, बल्कि हद तय करने के लिए है, तो समाज इसकी सराहना करता है।
सावधानी भी है जरूरी
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि शालीन व्यवहार की सामाजिक वैल्यू आज भी सबसे ज्यादा है। ऑफिस, इंटरनेट या पर्सनल रिश्तों में दिमाग इसी पैटर्न पर काम करता है, लेकिन रूखा जवाब देते समय सतर्कता बरतनी जरूरी है।
जवाब देने का मकसद सामने वाले को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि अपने सम्मान की रक्षा करना होना चाहिए। यानी ईंट का जवाब पत्थर देना अब सिर्फ एक मुहावरा नहीं रहा, बल्कि यह आपके दिमाग को सुरक्षित रखने और समाज में अपनी जगह बनाए रखने का एक वैज्ञानिक तरीका भी साबित हो रहा है।