बच्चा नहीं करता चीजें किसी से शेयर? पेरेंट्स इन 6 तरीकों से सिखाएं रिश्तों की अहमियत
बदलते दौर के साथ परवरिश का तरीका भी बदल रहा है, अब नन्हें बच्चों को छड़ी से सीख देने वाला जमाना नहीं रहा। ...और पढ़ें

छोटे बच्चों को हेल्दी रिलेशन के बारे में जरूरी है (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली: बदलते दौर के साथ परवरिश का तरीका भी बदल रहा है, अब इन नन्हें बच्चों को छड़ी से सीख देने वाला जमाना नहीं रहा। इसी बदलते समय की एक जरूरत यह भी बन गई है कि बच्चों को यह भी सिखाया जाए कि रिश्तों को कैसे संभाला जाता है। टूटते और बिगड़ते रिश्ते यह साफ संकेत कर रहे हैं कि बच्चों को रिश्ते संभालना सीखाना होगा। यहां कुछ ऐसे तरीके बताए जा रहे हैं जो छोटे बच्चों को हेल्दी रिलेशन के बारे में बताने में मदद कर सकते हैं।
मुश्किल समय को हैंडल करना सिखाएं
मुश्किल समय में भावनाएं रोकर या दु:खी होकर निकलती हैं पर इसे एक कमजोरी के तौर पर देखा जाता है। 1-3 साल की उम्र के बच्चे उस पड़ाव में होते हैं जब वो इन भावनाओं को समझने लगते हैं। उनके लिए इस उम्र में मुश्किल समय उनकी जिद पूरी न होना, चोट लग जाना या गलती पर डांट खाना है।
इस समय को इस्तेमाल करके उन्हें बताया जा सकता है कि मुश्किल समय में खुद को कैसे डील करते हैं। बच्चों के नाराज होने पर पेरेंट्स खुद को शांत रखें ताकि उन्हें एमर्जेंसी का सिग्नल न जाए और वो शांत होना सीख सकें। इसके अलावा, बच्चों के गुस्सा करने पर न आंख दिखाएं और न ही ऊंची आवाज में बोलें, क्योंकि यह उन्हें खतरे वाले मोड में ले जाता है।
दया और दूसरों के लिए महसूस करने की सीख
दया यानी kindness और दूसरों के लिए महसूस करना जिसे हम empathy कहते हैं दोनों ही बच्चों के भविष्य में हेल्दी रिलेशन बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। इसके लिए उन्हें रोजाना कहानी पढ़कर सुनाएं, इससे न केवल उनके कल्पना करने की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि दूसरों के लिए भावनाएं भी पैदा होंगी।
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फीलिंग्स को नाम देना जरूरी
नन्हें बच्चों को सिखाएं कि फीलिंग्स को कैसे नाम दिया जाता है। खुशी, गुस्सा या रोने जैसी भावनाओं को पिक्चर के माध्यम से बताएं। वहीं जब वो ज्यादा किसी बात के लिए अधिक उत्साही हों या गुस्से में हों तो उनके चेहरे के हाव भाव की उन्हें जानकारी दें।
सीमाएं बनवाना
सीमाएं तय करने के लिए उन्हें रिश्तों में सम्मान करने के बारे में बताएं, जैसे- बड़ों को सम्मान देना है, अपने से छोटों को प्यार देना है और हम उम्र के साथ बराबरी से पेश आना है। इसके अलावा, कब-किस चीज को ना कहना है इसकी भी जानकारी उन्हें दें जब वो कोइ ऐसा काम करें जिसे नहीं किया जाना चाहिए। यह तरीका न केवल रिश्ता हेल्दी करना सिखाएगा बल्कि अपने आसपास के लोगों के संग एक मर्यादा रेखा भी बनाता है।
अनहेल्दी बिहेवियर पर आवाज उठाना सिखाएं
यह आज के समय में सबसे जरूरी है कि बचपन से ही बच्चों को अच्छे और बुरे व्यवहार के बारे में बताया जाए, जिससे वो आगे चलकर किसी के बुरे बर्ताव को सहन न करते जाएं। किसी का धमकाना, बातों का हेर-फेर करना, झूठ बोलना या किसी का अपमान करना ये सभी अनहेल्दी बिहेवियर की पहचान बच्चों को करनी आनी चाहिए। उदाहरण के लिए अगर बच्चे को किसी डांटा है तो उन्हें तुरंत यह बात किसी को बताने के लिए कहें।
खिलौनों और गेम्स को हिस्सा बनाएं
परिवार और रिश्तों के बारे में बताने के लिए बच्चों के खिलौनों को एक जरिया बना लें। साथ ही, उनके साथ ग्रुप गेम्स खेलें, यह उन्हें सबके साथ रहने का एक संकेत देता है। साथ ही, उन्हें अपने खिलौने दूसरों को शेयर करना भी सिखाएं।