Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    'बीवी की कमाई पर बच्चे पाल रहे हो' - क्या समाज के यही ताने करते हैं पिता को बच्चों से दूर?

    Updated: Mon, 20 Apr 2026 12:10 PM (IST)

    आज 'इक्वल पेरेंटिंग' की बात तो होती है, मगर अभी भी पुरुष बच्चों के प्राइमरी केयरगिवर बनने से कतराते हैं। ...और पढ़ें

    क्या पुरानी सोच को ठेंगा दिखा रहे हैं नई पीढ़ी के पिता? (Image Source: AI-Generated)

    क्या पुरानी सोच को ठेंगा दिखा रहे हैं नई पीढ़ी के पिता? (Image Source: AI-Generated) 

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल हर जगह 'इक्वल पेरेंटिंग' यानी माता-पिता दोनों द्वारा बच्चों की बराबर जिम्मेदारी उठाने की बात होती है। आज की महिलाएं अपने करियर में तेजी से आगे बढ़ रही हैं, इसलिए पुरुषों से भी यह उम्मीद की जाती है कि वे घर और बच्चों को संभालने में उनका पूरा साथ दें।

    हालांकि, असल जिंदगी की तस्वीर थोड़ी अलग है। आज भी ज्यादातर घरों में पुरुष बच्चों की मुख्य देखभाल करने वाले (प्राइमरी केयरगिवर) बनने से कतराते हैं। आखिर ऐसा क्यों है? आइए, दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल की कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट, अर्पिता कोहली से समझते हैं इसके मुख्य कारण।

    Modern Parenting

    (Image Source: AI-Generated) 

    समाज के ताने और पुरानी सोच

    इस झिझक के पीछे सबसे बड़ी वजह हमारी सदियों पुरानी सामाजिक मानसिकता है। समाज ने हमेशा से यह तय कर रखा है कि पुरुष घर के लिए पैसे कमाएगा और महिला बच्चों को संभालेगी। भले ही जमाना बदल गया हो, लेकिन यह सोच आज भी कई घरों में कायम है। अगर कोई पिता बच्चों की देखभाल में ज्यादा वक्त देता है, तो उसे अक्सर समाज या रिश्तेदारों के तानों का शिकार होना पड़ता है, जिसके डर से पुरुष पीछे कदम खींच लेते हैं।

    वर्कप्लेस के नियम और छुट्टियों की कमी

    हमारे ऑफिस और कंपनियों का ढांचा भी इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। ज्यादातर कंपनियों में पिता बनने पर पुरुषों को बहुत ही कम या न के बराबर छुट्टियां मिलती हैं। इस कारण पिता को शुरुआती दिनों में अपने बच्चे के साथ समय बिताने और भावनात्मक रूप से जुड़ने का मौका ही नहीं मिल पाता। दूसरी तरफ, महिलाओं को लंबी मैटरनिटी लीव मिलती है, जिससे वे अपने आप ही बच्चे की मुख्य केयरगिवर बन जाती हैं।

    खबरें और भी

    फीलिंग्स को दबाना भी है बड़ी वजह

    बच्चों की देखभाल के लिए उनसे इमोशनली जुड़ना बहुत जरूरी है, लेकिन हमारे समाज में लड़कों को बचपन से ही यह सिखाया जाता है कि वे अपनी भावनाओं को खुलकर न जताएं। अपनी भावनाएं दबाने की इस आदत के कारण, पुरुष अक्सर बच्चों की मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को समझने में खुद को बहुत असहज महसूस करते हैं।

    Father child bonding

    (Image Source: AI-Generated) 

    कॉन्फिडेंस और स्किल्स की कमी

    एक बड़ा कारण यह भी है कि पुरुषों को पारंपरिक रूप से बच्चों को संभालने के तरीके नहीं सिखाए जाते। इसलिए, कई पिताओं के अंदर यह डर बैठा रहता है कि वे इस काम में सक्षम नहीं हैं। बच्चों की देखभाल को लेकर आत्मविश्वास की यही कमी उन्हें कोई भी नई पहल करने से रोक देती है।

    धीरे-धीरे बदल रही है तस्वीर

    हालांकि, हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और अच्छी बात यह है कि अब धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। सोशल मीडिया और लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की वजह से नई पीढ़ी के पिता अब काफी जागरूक हो गए हैं। वे न सिर्फ अपने बच्चों की देखभाल में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं, बल्कि उनके साथ एक बेहद मजबूत और प्यारा रिश्ता भी बना रहे हैं।

    यह भी पढ़ें- बच्चे के सामने पेरेंट्स काटते हैं एक दूसरे की बात, तो समझ लीजिए आप खुद बिगाड़ रहे हैं उनका भविष्य

    यह भी पढ़ें- क्या आपका बच्चा भी बात-बात पर हाथ उठाता है? एक्सपर्ट से जानें ये बुरी आदत छुड़ाने के 5 आसान तरीके