Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    सालों तक बंद रहा पूजा-पाठ, झेले विदेशी आक्रमणकारियों के सितम; क्या आपने देखा है ये अनोखा शिव मंदिर?

    Updated: Thu, 11 Jun 2026 10:33 AM (IST)

    तमिलनाडु के वेल्लोर किले में स्थित प्राचीन जलकंठेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जो 16वीं सदी की द्रविड़ वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। ...और पढ़ें

    विदेशी आक्रमणों को झेलकर भी शान से खड़ा है 'जलकंठेश्वर मंदिर' (Image Source: AI-Generated)

    विदेशी आक्रमणों को झेलकर भी शान से खड़ा है 'जलकंठेश्वर मंदिर' (Image Source: AI-Generated) 


    HighLights

    1. जलकंठेश्वर मंदिर वेल्लोर किले में स्थित प्राचीन शिव मंदिर

    2. 16वीं सदी की अद्भुत द्रविड़ वास्तुकला का बेजोड़ नमूना

    3. विदेशी आक्रमणों के बावजूद अपनी पहचान बचाए रखने में सफल

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत का दक्षिणी राज्य तमिलनाडु अपने भव्य मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इन्हीं में से एक बेहद खास और प्राचीन जगह है- वेल्लोर शहर के ऐतिहासिक किले के भीतर बसा 'जलकंठेश्वर मंदिर'।

    भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर सिर्फ आस्था का ही नहीं, बल्कि एक बेहद शानदार और प्राचीन वास्तुकला का भी बेजोड़ नमूना है। आइए, इस अद्भुत शिव मंदिर के इतिहास और इसकी खासियत के बारे में विस्तार से जानते हैं।

    Jalakandeswarar temple

    (Image Source: Instagram) 

    कैसे पड़ा 'जलकंठेश्वर' नाम?

    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थान पर भगवान शिव का शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था। प्राचीन काल में यह शिवलिंग पूरी तरह से पानी से घिरे हुए एक क्षेत्र में स्थापित था। जल के बीच विराजित होने के कारण ही भगवान शिव के इस रूप को 'जलकंठेश्वर' कहा जाने लगा। बाद में भक्तों ने ठीक उसी जगह पर मंदिर के मुख्य गर्भगृह का निर्माण करवाया, जो आज हजारों लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है।

    16वीं सदी की बेजोड़ द्रविड़ वास्तुकला

    अगर आप वास्तुकला या प्राचीन इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं, तो यह मंदिर आपको निराश नहीं करेगा। इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के दौरान स्थानीय नायकों और विजयनगर शासकों की देखरेख में हुआ था। यह द्रविड़ वास्तुकला का एक बहुत ही शानदार उदाहरण है।

    खबरें और भी

    मंदिर में मौजूद विशाल गोपुरम और पत्थरों पर की गई बेहद बारीक नक्काशी देखने लायक है। यहां के मंडपों में देवी-देवताओं, पौराणिक कहानियों, नर्तकों और वीर योद्धाओं की सुंदर मूर्तियां उकेरी गई हैं। दक्षिण भारतीय मंदिरों की बनावट और वास्तुकला का अध्ययन करने वालों के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण जगह है।

    Jalakandeswarar temple

    (Image Source: Instagram) 

    'कल्याण मंडपम' है सबसे खास आकर्षण

    जलकंठेश्वर मंदिर की वास्तुकला की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका 'कल्याण मंडपम' यानी विवाह मंडप है। विजयनगर के कलाकारों ने अपनी असाधारण प्रतिभा का इस्तेमाल करते हुए इसे सजाया है। इस मंडप में कई बेहद खूबसूरत और अलंकृत स्तंभ मौजूद हैं। इन खंभों पर घोड़ों पर बैठे योद्धाओं, 'याली' (शेर जैसी दिखने वाली एक पौराणिक आकृति), देवताओं और कई पुरानी कथाओं के दृश्यों को बड़ी ही बारीकी से तराशा गया है।

    विदेशी आक्रमणों का भी किया सामना

    इस मंदिर ने समय के साथ कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। इतिहासकारों की मानें तो विदेशी आक्रमणकारियों ने इस जगह को काफी नुकसान पहुंचाया था। इस वजह से यहां लंबे समय तक पूजा-पाठ भी बंद रहा। समय-समय पर इस इलाके पर अलग-अलग राजवंशों और विदेशी शक्तियों का कब्जा रहा, लेकिन इतनी मुश्किलों के बाद भी यह मंदिर अपनी सांस्कृतिक पहचान और अस्तित्व को बचाए रखने में कामयाब रहा।

    Jalakandeswarar temple tamilnadu

    (Image Source: Instagram) 

    शिव-भक्तों के लिए है शांति का प्रतीक

    आज के समय में महाशिवरात्रि, प्रदोष और भगवान शिव से जुड़े अन्य सभी प्रमुख त्योहारों पर यहां विशेष पूजा और बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं। मंदिर के अंदर का आध्यात्मिक माहौल भक्तों को एक गहरी शांति और भक्ति का अहसास कराता है।

    अगर आप दक्षिण भारत के इतिहास, वहां की संस्कृति और राजनीतिक व सैन्य विरासत को करीब से समझना चाहते हैं, तो जलकंठेश्वर मंदिर और वेल्लोर के किले का एक साथ भ्रमण करना आपके लिए एक शानदार अनुभव हो सकता है। फिलहाल, यह पूरा किला और इसके अंदर की सभी ऐतिहासिक धरोहरें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के कड़े संरक्षण में हैं।

    यह भी पढ़ें- MP टूरिज्म के छुपे हुए खजाने! खजुराहो के अलावा इन ऐतिहासिक जगहों को एक्सप्लोर करना न भूलें

    यह भी पढ़ें- भारत के रहस्यमयी मंदिर, जिन्हें सिर्फ एक रात में बनाया गया! एक तो भूतों ने किया था तैयार