भारत के रहस्यमयी मंदिर, जिन्हें सिर्फ एक रात में बनाया गया! एक तो भूतों ने किया था तैयार
भारत अपने प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है। इनमें कई मंदिरों से जुड़ी मान्यता है कि इन्हें महज एक रात में बनाया गया था। ...और पढ़ें

एक रात में बनाए गए थे ये मंदिर (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत अपनी संस्कृति, इतिहास और प्राचीन मंदिरों से लिए दुनियाभर में मशहूर है। हमारे देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनकी वास्तुकला और उनसे जुड़ी कहानियां किसी चमत्कार से कम नहीं लगतीं। इनमें कई मंदिरों का इतिहास कई सौ साल पुराना है और हर एक के निर्माण की अनोखी कहानी है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भारत में कुछ ऐसे मंदिर हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि इनका निर्माण केवल एक रात में किया गया था। आइए जानें भारत के ऐसे ही 5 रहस्यमयी मंदिरों के बारे में, जिनके बारे में मान्यता है कि इन्हें एक ही रात में बनाया गया था।
देवघर मंदिर (झारखंड)
झारखंड का देवघर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। पौराणिक कहानी के अनुसार, रावण भगवान शिव को शिवलिंग के रूप में अपने साथ लंका ले जाने की जिद पर अड़ गया था। शिव जी मान तो गए, लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी कि यह शिवलिंग रास्ते में कहीं भी जमीन को नहीं छूना चाहिए। रास्ते में रावण के साथ छल हुआ और शिवलिंग यहीं देवघर में स्थापित हो गया। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा ने वैद्यनाथ मंदिर का रातों रात निर्माण किया।

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गोविंद देव जी मंदिर (वृंदावन, उत्तर प्रदेश)
उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित गोविंद देव जी मंदिर को लेकर भी बेहद दिलचस्प कहानी प्रचलित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु के सम्मान में इस मंदिर को इंसानों ने नहीं, बल्कि देवताओं ने रातों-रात बनाया था। कहा जाता है कि वे सूर्योदय से पहले मंदिर का निर्माण पूरा नहीं कर पाए, इसलिए मंदिर की संरचना अधूरी रह गई।
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काकनमठ मंदिर (मुरैना, मध्य प्रदेश)
मध्य प्रदेश के मुरैना में स्थित काकनमठ मंदिर से जुड़ी कहानी बेहद हैरान करने वाली है। कहा जाता है कि इस मंदिर को भगवान शिव के भक्त भूतों ने रातों-रात मिलकर बनाया था। हालांकि, सुबह तक निर्माण पूरा न हो पाने की वजह से मंदिर अधूरा रह गया था। आज भी यहां लोग इस मंदिर में शिवलिंग के दर्शन के लिए आते हैं।

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भोजेश्वर मंदिर (भोजपुर, मध्य प्रदेश)
माना जाता है कि भोजपुर का यह मंदिर महाभारत काल का है। मान्यता के अनुसार, जब पांडव वनवास पर थे, तब उनके सपने में भगवान शिव ने दर्शन दिए थे। अगली सुबह पांडवों ने इस सपने के बारे में अपनी मां कुंती से बात की। मां की सलाह पर, पांडवों ने ठीक उसी जगह पर मंदिर बनाने का फैसला किया और रातों-रात इस मंदिर का निर्माण किया गया।

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हथिया देवाल मंदिर (पिथौरागढ़, उत्तराखंड)
उत्तराखंड के इस मंदिर की कहानी बेहद दिलचस्प है। माना जाता है कि इस मंदिर को एक हाथ वाले शिल्पकार ने रातों-रात एक पत्थर को तराशकर बनाया था। हालांकि, अंधेरे के कारण उससे शिवलिंग उल्टी दिशा में बन गया, जिसके कारण यहां शिवलिंग की पूजा नहीं होती।