Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    भारतीय रेलवे का आखिरी स्टेशन, जहां से कुछ ही कदम पर शुरू होता है दूसरा देश; नहीं रुकती कोई पैसेंजर ट्रेन

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 09:48 AM (IST)

    भारतीय रेलवे का पूर्वी सीमांत रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में है। यह स्टेशन दूसरे देश की सीमा से बस कुछ ही कदम दूर है। ...और पढ़ें

    देश का आखिरी रेलवे स्टेशन (Picture Courtesy: Instagram/ Freepik)

    देश का आखिरी रेलवे स्टेशन (Picture Courtesy: Instagram/ Freepik)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जंगलों, पहाड़ों और रेगिस्तान से होकर गुजरती भारतीय रेल की पटरियां देश के कोने-कोने को जोड़ने का काम करती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं भारतीय रेलवे का फैला ये जाल खत्म कहां होता है?

    भारत के अलग-अलग छोरों पर ऐसे रेलवे स्टेशन हैं, जहां से आगे भारतीय रेलवे की पटरियां नहीं जातीं, जैसे- बारामूला रेलवे स्टेशन सबसे उत्तरी रेलवे स्टेशन हैं, कन्याकुमारी सबसे दक्षिणी है और ओखा सबसे पश्चिमी रेलवे स्टेशन है, लेकिन आज हम बात पूर्वी सीमांत रेलवे स्टेशन की करने वाले हैं। आइए जानें भारत का आखिरी स्टेशन कौन-सा है और क्यों ये स्टेशन खास है। 

    भारत का आखिरी रेलवे स्टेशन

    भारत के पूर्व में रेलवे लाइन पश्चिम बंगाल के सिंहाबाद रेलवे स्टेशन पर खत्म होती है। यह मालदा जिले के हबीबपुर ब्लॉक में स्थित है और भारतीय रेलवे नेटवर्क का पूर्वी सीमांत स्टेशन है। इसके आगे से बांग्लादेश की सीमा शुरू हो जाती है। 

    इस भौगोलिक खासियत के साथ-साथ यह स्टेशन ऐतिहासिक रूप से भी काफी खास है। इस स्टेशन पर आज भी ब्रिटिश शासन काल में इस्तेमाल होने वाले गियर और बैरियर जैसे उपकरण मौजूद हैं। हालांकि, यहां के टिकट काउंटर बंद रहते हैं। 

    कोई भी यात्री ट्रेन नहीं रुकती

    इस स्टेशन की हैरान करने वाली बात यह है कि यहां कोई भी पैसेंजर ट्रेन नहीं रुकती। बंटवारे के बाद धीरे-धीरे यहां यात्री सेवाएं बंद की दी गईं। आज यहां के प्लैटफॉर्म पूरी तरह सुनसान रहते हैं और सिर्फ मालगाड़ी का आवाजाही के लिए इस स्टेशन का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए यहां सिर्फ कुछ चुनिंदा रेलवे कर्मी ही देखने को मिलते हैं।

    खबरें और भी

    अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की फलाइन

    विभाजन के बाद भले ही यहां पैसेंजर ट्रेनें बंद कर दी गईं, लेकिन इसके बावजूद यह स्टेशन भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा। साल 1978 में भारत और बांग्लादेश के द्वीपक्षीय समझौते के बाद यहां से मालगाड़ियों की आवा-जाही शुरू हुई। स्टोन चिप्स जैसी चीजों का ट्रांसपोर्ट इस रेल कॉरिडोर के जरिए होता है। 

    सीमा पार का जुड़ाव

    सिंहाबाद के ठीक आगे बांग्लादेश का रोहनपुर रेलवे स्टेशन आता है। भौगोलिक रूप से यह पूर्व की तरफ भारत का वह अंतिम छोर है, जहां भारतीय रेलवे की पटरियां सीधे पड़ोसी देश की पटरियों से जाकर मिलती हैं, लेकिन भारतीय रेल सेवाएं इसी स्टेशन पर आकर रुक जाती हैं।

    इन्हीं कारणों से यह रेलवे स्टेशन भारतीय रेल के लिए कमर्शियली फायदेमंद नहीं है, लेकिन जीयोपॉलिटिक्स के लिए काफी अहम है।