पहाड़ों के बीच बसे बौद्ध मठ: लेह-लद्दाख की इन खूबसूरत लोकेशंस पर जाकर थम जाती है जिंदगी
लेह लद्दाख की प्राकृतिक सुंदरता को छोड़ दें तो बौद्ध संस्कृति के बारे में कम बात की जाती है। ...और पढ़ें

लेह लद्दाख बौद्ध संस्कृति की धरोहर है (Image Source: AI Generated)
HighLights
लेह प्राचीन बौद्ध मठों का केंद्र, समृद्ध संस्कृति का प्रतीक
थिकसे, हेमिस, डिस्किट जैसे मठों में कला और सीख
मई से सितंबर लेह घूमने का सबसे अच्छा समय
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली: भारत सांस्कृतिक धरोहर वाला देश है जहां हर थोड़ी दूरी पर नई संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। इन्हीं संस्कृति का एक हिस्सा है लद्दाख का लेह। वैसे आजकल लद्दाख की राजधानी लेह रोड ट्रिप के लिए ज्यादा फेमस है क्योंकि बाइक राइडर्स में यहां आने का क्रेज बढ़ता जा रहा है। लेकिन लेह लद्दाख की प्राकृतिक सुंदरता और बर्फीले पहाड़ों को छोड़ दें तो बौद्ध संस्कृति के बारे में कम बात की जाती है। ऐसे बहुत कम लोग हैं जो यह जानते हैं कि लेह प्राचीन बौद्ध मठों का केंद्र है।
मठों का केंद्र लेह
लेह मठों का केंद्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां सदियों पुराने मठ मौजूद हैं जो बौद्ध संस्कृति को संजोए हुए हैं। 11,000 फीट की ऊंचाई पर मौजूद लेह में हेमिस, थिकसे, डिस्कीट और स्पितुक नामक प्राचीन मठ हैं जिनका अपना अलग इतिहास है।
सबसे खास बात यह कि ये बौद्ध मठ केवल पूजा करने का स्थान नहीं है बल्कि संस्कृति, कला और सीख लेने के लिए अहम है। चलिए लेह के इन मठों के बारे में एक-एक करके बात करते हैं:
थिकसे मठ
थिकसे मठ लेह से करीब 19 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद 12 मंजिला एक ऊंची इमारत है। यहां पर्यटकों को शांत और सुंदर नजारे देखने के साथ ही मूर्तियां, थांगका (सूती कपड़े पर की जाने वाली पेंटिंग) देखने को मिलती हैं।
इसके अलावा, यहां एक बुद्ध भगवान का एक स्तंभ भी है जिसपर उनके उपदेश लिखे हुए हैं। वहीं यहां आयोजित होने वाला थिकसे फेस्टिवल इस जगह का आकर्षण का केंद्र है।
हेमिस मठ
हेमिस मठ लेह से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक सबसे बड़ा हिमालयी मठ है। यहां मठ की दीवारों पर चक्र भी लगे हुए है, जो जीवन के कालचक्र दर्शाते हैं। अभी इस मठ की देखरेख का जिम्मा द्रुकपा संप्रदाय का है। इस तरह हेमिस मठ की लोकेशन और इतिहास इस जगह को खास बनाता है।
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डिस्किट मठ
नुब्रा वैली में स्थित डिस्किट मठ पहाड़ों के सुंदर नजारों के साथ तिब्बत संस्कृति का अद्भुत नमूना है। 14वीं शताब्दी में बना यह मठ लेह से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसकी लोकेशन की बात करें तो यह मठ श्योक नदी के पास एक ऊंची चोटी पर है।
लेह जाने का सबसे सही समय
लेह घूमने जाने का सबसे अच्छा समय मई से सितंबर के बीच का है। इस समय लेह का मौसम सुहावना होता है और रोड का संपर्क भी ठीक रहता है। जबकि सितंबर के बाद जाना आपके सफर का रोमांच कम कर सकता है क्योंकि इस दौरान वहां बर्फबारी ज्यादा होती है।