MP दिलीप राय के सवाल पर संसद में खुलासा: देश में 5.64 करोड़ मामले लंबित, ओडिशा में 1.69 लाख से अधिक मुकदमे
सांसद दिलीप राय के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश की अदालतों में 5.64 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। ...और पढ़ें

सांसद दिलीप राय। सौ- संसद टीवी
HighLights
देशभर में 5.64 करोड़ से अधिक मामले लंबित।
ओडिशा हाईकोर्ट में 1.69 लाख से ज्यादा मुकदमे लंबित।
सरकार त्वरित न्याय हेतु ई-कोर्ट परियोजना पर कार्यरत।
जागरण संवाददाता, राउरकेला। ओडिशा से राज्यसभा सांसद और राउरकेला के नेता दिलीप राय द्वारा उच्च सदन में पूछे गए एक महत्वपूर्ण सवाल के जवाब में न्यायपालिका पर मुकदमों के भारी बोझ की वास्तविक तस्वीर सामने आई है।
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में सांसद राय को जानकारी देते हुए बताया कि ओडिशा सहित पूरे देश की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या 5.64 करोड़ के पार पहुंच चुकी है।
ओडिशा हाईकोर्ट और निचली अदालतों में न्याय का इंतजार
सांसद दिलीप राय के सवाल पर ओडिशा राज्य की न्यायिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए कानून मंत्री ने बताया कि 16 जुलाई 2026 तक अकेले ओडिशा हाईकोर्ट में कुल 1,69,320 मामले विचार के लिए लंबित पड़े थे। इन लंबित प्रकरणों में से 376 मामले तीस साल से अधिक, 7035 बीस साल से अधिक, 38,866 दस साल से अधिक और 69,684 मामले पांच साल से ज्यादा पुराने हैं।
इसके साथ ही राज्य के विभिन्न जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां इसी अवधि तक कुल 18,68,323 मामले लंबित थे। निचली अदालतों में न्याय की बाट जोह रहे इन मुकदमों में 4441 मामले तीन दशक से भी अधिक पुराने हैं, जबकि बीस साल से पुराने 45,333, दस साल से पुराने 3,07,216 और पांच साल से पुराने 7,66,177 मामले शामिल हैं।
देश भर में 5.64 करोड़ मुकदमों का अंबार
राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों का ब्योरा देते हुए मंत्री ने बताया कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 96,024 मामले लंबित हैं, जबकि देश भर के विभिन्न उच्च न्यायालयों में यह आंकड़ा 64 लाख 72 हजार को पार कर गया है। सर्वोच्च न्यायालय में 24,611 मामले पांच साल से अधिक, 10,094 मामले दस साल से अधिक, 558 मामले बीस साल से अधिक और 26 मामले तीस साल से भी ज्यादा पुराने हैं।
अगर देश के 25 उच्च न्यायालयों की बात करें तो सबसे ज्यादा 12,28,353 मामले अकेले इलाहाबाद हाईकोर्ट में फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट में 6,96,348, बॉम्बे हाईकोर्ट में 6,57,813, मद्रास हाईकोर्ट में 5,67,814 और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 4,90,363 मामले लंबित पड़े हैं। देश भर के उच्च न्यायालयों में कुल मिलाकर 80,660 मामले तीस साल से अधिक समय से अटके हुए हैं।
खबरें और भी
त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतों और समितियों का गठन
कानून मंत्री श्री मेघवाल ने अपने उत्तर में सदन को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार लंबित मामलों की संख्या को कम करने और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए निरंतर काम कर रही है। हालांकि मुकदमों का अंतिम निपटारा न्यायपालिका की व्यवस्था पर निर्भर करता है, लेकिन सरकार ने इसके समाधान के लिए ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण के वास्ते 7,210 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की है।
संवेदनशील मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की स्थापना की जा रही है। इसके अतिरिक्त, पुराने मामलों के जल्द निपटारे के लिए हाईकोर्ट और जिला अदालत स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया गया है और मुकदमों के वैकल्पिक समाधान के साथ-साथ लोक अदालतों के माध्यम से भी जल्द फैसले कराने के कदम उठाए जा रहे हैं।