मुआवजा मिला, लेकिन आम लोगों की सुरक्षा का कौन उठाएगा जिम्मा? ओडिशा का रम्पेला पुल बना मौत का हाईवे
रम्पेला पुल पर जेएसडब्ल्यू सुरक्षाकर्मी की मौत से उपजा जनाक्रोश औद्योगिक वाहनों के अनियंत्रित आवागमन को नियंत्रित करने में प्रशासन की विफलता को उजागर ...और पढ़ें

AI Generated Image
HighLights
रम्पेला पुल पर जेएसडब्ल्यू सुरक्षाकर्मी की मौत से जनाक्रोश।
औद्योगिक वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही बनी मौत का हाईवे।
हादसे रोकने को ठोस उपाय, सीसीटीवी निगरानी की मांग।
संवाद सूत्र, ब्रजराजनगर। रम्पेला पुल पर जेएसडब्ल्यू कंपनी के सुरक्षाकर्मी अंतर्यामी किसान की मौत के बाद उपजा जनाक्रोश भले ही 13 लाख रुपये के मुआवजे और नौकरी के लिखित आश्वासन के बाद शांत हो गया हो, लेकिन इस हादसे ने व्यवस्था के चेहरे पर कई गंभीर सवाल दाग दिए हैं।
सवाल यह है कि औद्योगिक रसूखदारों के आगे नतमस्तक प्रशासन क्या आम नागरिक की जान की कीमत सिर्फ चंद रुपयों का मुआवजा मानता है? आज बड़ा सवाल यह खड़ा है कि अगर किसी रसूखदार कंपनी के कर्मचारी के बजाय कोई आम राहगीर, गरीब किसान, मजदूर या छात्र इस खूनी मार्ग की भेंट चढ़ जाए, तो उसके परिवार का जिम्मा कौन उठाएगा? क्या तब भी प्रशासन और पुलिस इसी मुस्तैदी से न्याय दिलाने सड़क पर उतरेंगे?
हकीकत यह है कि रम्पेला पुल और उससे जुड़ा पूरा मार्ग भारी औद्योगिक वाहनों की अनियंत्रित और जानलेवा आवाजाही के कारण मौत का हाईवे बन चुका है। कोयले से लदे ओवरलोड ट्रकों की अंधाधुंध रफ्तार, उड़ती धूल और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते वाहन चालकों पर नकेल कसने में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।
हैरान करने वाली बात यह है कि पुल के ठीक पास पुलिस चौकी होने के बावजूद ये मौत के सौदागर बेखौफ दौड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का यह संगीन आरोप व्यवस्था को झकझोरने के लिए काफी है कि 'सुविधा शुल्क' के खेल में आम लोगों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया गया है।
खबरें और भी
अब समय आ गया है कि हादसों के बाद मुआवजे की रेवड़ियां बांटने के बजाय हादसों को रोकने के लिए ठोस और जवाबदेह व्यवस्था लागू की जाए। जब तक ओवरलोडिंग के खिलाफ नियमित अभियान, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और दोषी पुलिसकर्मियों व कंपनियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह आक्रोश थपने वाला नहीं है। उद्योगों के विकास की कीमत आम नागरिकों की लाशों से नहीं चुकाई जा सकती।