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    ओडिशा में प्राइमरी शिक्षा संकट में: राउरकेला में रिटायर हुए 71 शिक्षक, खाली पदों को भरने में सरकार नाकाम

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 06:19 PM (IST)

    राउरकेला में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में है, जहाँ पिछले एक साल में 71 शिक्षक सेवानिवृत्त हुए हैं लेकिन सरकार खाली पदों को भरने में नाकाम र ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. राउरकेला में 71 प्राथमिक शिक्षक एक साल में सेवानिवृत्त हुए।

    2. सरकार खाली पदों को भरने में पूरी तरह विफल रही।

    3. शिक्षकों की कमी से बच्चों की प्राथमिक शिक्षा संकट में।

    जागरण संवाददाता, राउरकेला। राउरकेला और आसपास के क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमराने की कगार पर पहुंच गई है। स्कूलों से लगातार शिक्षक सेवानिवृत्त (रिटायर) हो रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से इन खाली पदों को भरने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसके चलते प्राथमिक स्तर पर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और भविष्य के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

    प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल अप्रैल महीने से लेकर इस साल जून महीने के अंत तक क्षेत्र के विभिन्न प्राथमिक स्कूलों से कुल 71 शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनमें सबसे अधिक 26 शिक्षक अकेले जून महीने में ही सेवानिवृत्त हुए। वहीं, मई 2025 में 7 शिक्षक और मई 2026 में 8 शिक्षकों ने अवकाश ग्रहण किया।

    नहीं हो रही नई नियुक्तियां

    इस तरह विभिन्न महीनों में लगातार शिक्षक सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं, लेकिन उनकी जगह नई नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। दूसरी तरफ, सरकार ने प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के नाम पर 'शिशु वाटिका' जैसी नई व्यवस्थाएं तो शुरू कर दी हैं, जिसके तहत पहली से आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई को एक नई दिशा देने का प्रयास किया गया है। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।

    नई व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक शिक्षकों की तैनाती न होने के कारण यह योजना विद्यालय के प्रधानाध्यापकों के लिए एक बड़ा बोझ बनकर रह गई है। कई प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अनुपात के हिसाब से शिक्षक न होने के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना शिक्षकों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।

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    इकलौते शिक्षक हुए रिटायर

    राउरकेला शहर के मध्य में स्थित बिरजापाली प्राथमिक विद्यालय का उदाहरण देखें तो, वहां तैनात इकलौते शिक्षक इसी साल अप्रैल में सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद से पूरा स्कूल केवल एक गण शिक्षक के भरोसे चल रहा है। यहां पांच अलग-अलग कक्षाएं हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए सिर्फ एक शिक्षक होने के कारण अभिभावक चालू शैक्षणिक सत्र में अपने बच्चों का दाखिला इस स्कूल में कराने से कतरा रहे हैं।

    इसी तरह डेवल्प एरिया स्थित हाई स्कूल में जहां 9वीं कक्षा तक के लिए 212 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, वहां शिक्षकों की संख्या महज 3 है। छेंड हाउसिंग बोर्ड विद्यालय में 300 छात्रों पर केवल 4 शिक्षक तैनात हैं।

    9 कक्षाओं को संभालने के लिए सिर्फ 3 शिक्षक

    लेबर टेनामेंट स्थित गोपबंधु यूपी स्कूल की स्थिति भी दयनीय है। वहां एक शिक्षक के सेवानिवृत्त होने के बाद अब 140 छात्र-छात्राओं और 9 अलग-अलग कक्षाओं को संभालने के लिए सिर्फ 3 शिक्षक बचे हैं। इसी तरह बंडामुंडा के मधुसूदन विद्यालय में 420 छात्र-छात्राओं के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी केवल 5 शिक्षकों के कंधों पर है।

    बीते दिनों शिक्षकों की भारी कमी के कारण जिस तरकेरा विद्यालय में ताला लटकने की नौबत आ गई थी, वहां पहले सिर्फ एक शिक्षक तैनात थे। अब हेमगिरि से स्थानांतरित होकर आए एक नए शिक्षक की नियुक्ति वहां कर दी गई है। हालांकि, 140 छात्रों के लिए यह व्यवस्था भी नाकाफी है, फिर भी अस्थाई तौर पर स्कूल को चालू रखने में इससे थोड़ी मदद मिली है।

    राउरकेला महानगर निगम और बिसरा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कई प्राथमिक विद्यालयों की तस्वीर आज ऐसी ही धुंधली और चिंताजनक बनी हुई है। आने वाले समय में भी शिक्षकों की सेवानिवृत्ति का यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा।

    शिक्षाविदों का स्पष्ट रूप से मानना है कि यदि सरकार ने इस गंभीर स्थिति को समय रहते नहीं संभाला और तत्काल नए शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति नहीं की, तो क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा का ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगा।

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