CWG 2026: जूडो में भारत का ‘गोल्डन डबल’ तो नीरज ने बरसाई चांदी, तेजस्विन शंकर ने रचा इतिहास
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया, जूडो में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में रजत और तेजस्विन शंकर ...और पढ़ें

भारतीय खिलाड़ियों ने किया कमाल

समय कम है?
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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली : ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए शुक्रवार बेहद शानदार रहा। भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने इतिहास रचते हुए दो स्वर्ण और एक रजत पदक अपने नाम किए। अस्मिता और हर्ष के स्वर्ण ने भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या को पांच तक पहुंचा दिया। जूडो में यामिनी मौर्य ने रजत पदक जीता।
देर रात भाला फेंक स्पर्धा में भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने रजत पदक जीता तो यशवीर सिंह ने कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया।
मुक्केबाजों ने की शुरुआत
इससे पहले मुक्केबाजी में जैस्मीन लैंबोरिया (57 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), अंकुश पंघाल (80 किग्रा), जादुमणि सिंह (55 किग्रा), प्रिया (60 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), लवलीना बोरगोहाइ (75 किग्रा), सचिन (60 किग्रा) और नरेन्द्र (90+ किग्रा) ने फाइनल में प्रवेश करते हुए कम से कम रजत पदक पक्के कर लिए।
स्वर्णिम सफलता नहीं दोहरा सके नीरज
2018 गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने अपने दूसरे प्रयास में 85.83 मीटर का थ्रो फेंका, जो सत्र में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इस थ्रो के बाद नीरज पहले नंबर पर पहुंच गए थे, लेकिन श्रीलंका के रुमेश थरंगा पाथिरागे ने 89. 75 मीटर की थ्रो फेंककर नीरज को दूसरे स्थान पर धकेल दिया। इसके बाद नीरज इस मार्क को पार नहीं कर सके। यशवीर ने अपने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का थ्रो फेंककर कांस्य पदक अपने नाम किया। अन्य भारतीय रोहित यादव छठे स्थान पर रहे। ओलिंपिक चैंपियन अरशद नदीम तो शीर्ष आठ में जगह तक नहीं बना सके। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 77.41 मीटर की थ्रो के साथ नौवें स्थान पर रहे।
जूडो में कमाल
त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में कनाडा की हाइडी क्वाच को रोमांचक गोल्डन स्कोर मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक जीता। ये राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में भारत का पहला स्वर्ण पदक है। फाइनल में उन्होंने एक युको अंक गंवाया और फिर पेनाल्टी मिलने से कनाडाई खिलाड़ी बढ़त पर पहुंच गईं, लेकिन अस्मिता ने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला 1-1 से बराबर कर दिया। निर्धारित चार मिनट में कोई भी निर्णायक अंक नहीं बना, जिसके बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंचा। यहां अस्मिता ने दबाव में बेहतरीन आक्रमण करते हुए एक और युको हासिल किया और स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
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23 वर्षीय हर्ष सिंह ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में बड़ा उलटफेर किया। उन्होंने कई बार के ओशिनिया चैंपियन, पूर्व ओलिंपियन और बर्मिंघम 2022 के कांस्य पदक विजेता जोशुआ काट्ज को हराया। हर्ष ने मुकाबला खत्म होने से 41 सेकेंड पहले शानदार वाजा-अरी दांव लगाकर बढ़त बनाई और फिर अंत तक उसे बरकरार रखते हुए ऐतिहासिक स्वर्ण जीत लिया।
तेजस्विन शंकर ने किया कमाल
वहीं तेजस्विन शंकर ने इतिहास रच दिया। एथलेटिक्स की सबसे कठिन प्रतियोगिता मानी जानी वाली डिकैथलॉन में कांस्य पदक जीत तेजस्विन इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। तेजस्विन ने 7976 अंकों के साथ ये पदक जीता। प्रतियोगिता के आखिरी इवेंट 1500 मीटर में तेजस्विन ने 4:36.19 मिनट का टाइम निकाला। प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर (8096 अंक) जबकि रजत पदक कनाडा के डैमियन वार्नर (8036 अंक) ने जीता। दो दिन तक चलने वाले डिकैथलॉन में हर एथलीट को पहले दिन 100 मीटर फर्राटा, लंबी कूद, गोला फेंक, ऊंची कूद, 400 मीटर की रेस और दूसरे दिन 110 मीटर बाधा दौड़, चक्का फेंक, पोल वॉल्ट, भाला फेंक और 1500 मीटर की रेस लगानी होती है। हर इवेंट के लिए अलग-अलग अंक मिलते हैं और अंत में शीर्ष तीन एथलीटों को पदक दिए जाते हैं।
आज ‘गोल्डन पंच’ लगाने उतरेंगे मुक्केबाज
शुक्रवार को जैस्मीन, जादुमणि, अंकुश, प्रीति और अरुंधति समेत 10 मुक्केबाजों ने अपने-अपने वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबलों में एकतरफा जीत दर्ज की। शनिवार को ये सभी स्वर्ण पदक जीतने के लिए रिंग में उतरेंगे। 10 भारतीय मुक्केबाज सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ पहले ही 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों की सफलता को पीछे छोड़ चुके हैं। बर्मिंघम में मुक्केबाजी में भारत को सात पदक मिले थे, जिनमें से तीन स्वर्ण पदक थे।