CWG 2026: एक बेटे की मां और पीएचडी होल्डर सीमा कालीरमन ने मचाया तहलका, रोमांचक मुकाबले में ब्रॉन्ज मेडल किया अपने नाम
सीमा कालीरमन ने ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीता, जो उनके करियर का पहला बड़ा मेडल है। एक पीएचडी धारक और तीन साल के बेटे की ...और पढ़ें
HighLights
सीमा कालीरमन ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता
वह पीएचडी धारक और तीन साल के बेटे की मां हैं
पति रवींद्र के मार्गदर्शन में हासिल की यह बड़ी उपलब्धि
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। जब किस्मत और मेहनत साथ हो तो फिर बिगड़े हुए काम भी बन जाते हैं। कुछ ऐसा ही भारत की डिस्कस थ्रोअर महिला खिलाड़ी सीमा कालीरमन के साथ हुआ है। सीमा ने ग्लास्गो में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। सीमा ने 58.65 मीटर का अपना बेस्ट थ्रो फेंका और मेडल जीता।
सीमा के महज दो थ्रो ही सही थे और बाकी फाउल के कारण अमान्य घोषित कर दिए गए थे। इन्हीं दो में से एक ने उन्हें मेडल दिला दिया। उन्हें कैमरून की मोनी नोरा अतिम टक्कर दे रही थीं। आखिरी थ्रो में अगर वह 58.65 मीटर से ज्यादा का थ्रो फेंक देतीं तो सीमा के हाथ से मेडल चला जाता, लेकिन किस्मत ने यहां उनका साथ दिया और कैमरून की खिलाड़ी पीछे रह गईं।
जमैका की समांथा हॉल ने 61.66 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता। वहीं कनाडा की जूलिया टंक्स ने 60.67 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर अपने नाम किया।
सीमा हैं पीएचडी होल्डर
सीमा के लिए यहां तक का सफर आसान नहीं रहा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वह तीन साल के बेटे की मां हैं और साथ में वह फिजिकल एज्यूकेशन में डॉक्टरेट हैं। हरियाणा से आने वाली 27 साल की सीमा ने मां बनने के बाद पिछले साल नेशनल गेम्स में वापसी की थी। उनका बेटा तीन साल का है और ऐसे में उनके लिए खेल के लिए समय निकालना काफी मुश्किल भरा रहता है। इस दौरान उनके पति रवींद्र जो उनके कोच भी हैं उन्होंने सीमा की हौसल अफजाई की।
Result Update 🚨: Athletics, Women's Discus Throw
— SAI Media (@Media_SAI) July 30, 2026
Seema adds another medal to India's athletics campaign at the Commonwealth Games!
The NCOE Patiala athlete claimed Bronze with a best throw of 58.65m, delivering another strong performance for India🇮🇳#Cheer4Bharat #CWG2026… pic.twitter.com/5iYSTYMXhT
रवींद्र खुद नेशनल स्तर के डिस्कस थ्रोअर रह चुके हैं। उनके मार्गदर्शन से ही सीमा ने अपने करियर के मुश्किल पड़ाव को पार किया और यहां तक का सफर तय किया। मां बनने के बाद सीमा को तमाम तरह की दिक्कतें आ रही थीं। वह सही से थ्रो भी नहीं कर पा रही थीं, लेकिन पति की मदद से उन्होंने सारी बाधाओं को पार किया।
सीमा ने जारी रखी परंपरा
ये उनका बड़े मंच पर पहला मेडल है। इसी के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में डिस्कस थ्रो में भारतीय महिलाओं के मेडल जीतने की परंपरा को जारी रखा है। यह भारत का महिला डिस्कस थ्रो में नौवां मेडल है। इसी के साथ सीमा कॉमनवेल्थ गेम्स में डिस्कस थ्रो में मेडल जीतने वाली भारत की छठी महिला खिलाड़ी हैं।