अमृतसर में रखड़ पुन्निया मेले में कांग्रेस रैली में फिर दिखी गुटबंदी, चन्नी खेमा रहा हावी; वड़िंग गुट रहा दूर
बाबा बकाला साहिब की कांग्रेस रैली में चन्नी खेमे के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी प्रमुख रही। राजा वड़िंग गुट के ...और पढ़ें

रखड़ पुन्निया मेले में कांग्रेस का सजा मंच।
HighLights
कांग्रेस रैली में चन्नी खेमा मंच पर दिखा हावी।
प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग गुट के नेता रहे नदारद।
पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी फिर से चर्चा में आई।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। रखड़ पुन्निया मेले के दौरान अमृतसर के बाबा बकाला साहिब में कांग्रेस की ओर से आयोजित रैली में पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी एक बार फिर चर्चा में रही। रैली के मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ माझा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग गुट के नेताओं की मौजूदगी नजर नहीं आई।
मंच पर पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, भारत भूषण आशु, राणा गुरजीत सिंह और पूर्व विधायक रमनजीत सिंह सिक्की समेत कई प्रमुख नेता चन्नी के साथ दिखाई दिए। मंच और पोस्टरों पर भी चन्नी खेमे के नेताओं की प्रमुखता रही। इससे रैली में कांग्रेस की एकजुटता से ज्यादा पार्टी के भीतर चल रही खेमेबाजी चर्चा का विषय बनी रही।
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मंच पर चन्नी खेमे का शक्ति प्रदर्शन
रैली में चन्नी के साथ माझा क्षेत्र के कई वरिष्ठ नेताओं का एक मंच पर जुटना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, मंच पर एक ही खेमे के नेताओं की प्रमुख मौजूदगी ने पार्टी की अंदरूनी स्थिति को लेकर सवाल भी खड़े कर दिए। कांग्रेस में लंबे समय से अलग-अलग नेताओं के बीच खेमेबाजी की चर्चा होती रही है। बाबा बकाला साहिब की रैली के मंच और पोस्टरों ने इन चर्चाओं को फिर हवा दे दी।
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2027 से पहले एकजुटता बड़ी चुनौती
माझा की राजनीति में बाबा बकाला साहिब का रक्खड़ पुन्निया मेला खास महत्व रखता है। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का यहां जुटना पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है। एक तरफ चन्नी खेमे के नेता एकजुट नजर आए, वहीं राजा वड़िंग गुट की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया।
अब नजर इस बात पर है कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व पार्टी के अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने में कितना सफल रहता है। आने वाले कार्यक्रमों में दोनों खेमों के नेताओं की भागीदारी से पार्टी की अंदरूनी स्थिति की तस्वीर और साफ हो सकती है।
