राजोआणा का जत्थेदार को भावुक पत्र, 15 साल से लंबित अपील पर उठाए सवाल; जल्द स्पष्ट फैसले की रखी मांग
पूर्व सीएम बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी बलवंत सिंह राजोआणा ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को पत्र लिखा है। जिसमें 15 वर्षों से लंबित अपील और दया ...और पढ़ें

बलवंत सिंह राजोआणा।
HighLights
राजोआणा ने जत्थेदार को पत्र लिखकर सवाल उठाए।
15 साल से लंबित अपील पर जल्द निर्णय मांगा।
सिख संस्थाओं के सम्मान से जुड़ा बताया मामला।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। पंजाब की पटियाला जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी बलवंत सिंह राजोआणा ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को पत्र लिखकर अपनी लंबित अपील और दया याचिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने करीब 15 वर्षों से अंतिम निर्णय नहीं होने पर चिंता जताते हुए श्री अकाल तख्त साहिब से उचित दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की है।
राजोआणा ने अपने पत्र में लिखा है कि 31 मार्च 2012 को चंडीगढ़ की सत्र अदालत ने उनके खिलाफ डेथ वारंट जारी किया था। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा संघर्ष श्री अकाल तख्त साहिब को समर्पित कर दिया और आगे की कानूनी प्रक्रिया भी उसके मार्गदर्शन में चलती रही। उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी लगातार उनके मामले की पैरवी करती रही है, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी अपील पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया।
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31 साल के इंतजार पर उठाए सवाल
पत्र में उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की अपील का नहीं, बल्कि सिख संस्थाओं के सम्मान और उनके फैसलों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब से आग्रह किया कि यदि आवश्यक समझा जाए तो अपील वापस लेने या आगे की रणनीति को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं, ताकि लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता समाप्त हो सके।
राजोआणा ने यह भी लिखा कि उन्होंने लगभग 31 वर्ष पहले अदालत के सामने अपने कृत्य को स्वीकार कर लिया था। इसके बावजूद उन्हें वर्षों तक अंतिम फैसले का इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर उनकी अपील और दया याचिका इतने लंबे समय से लंबित रखी गई है और इस देरी का जिम्मेदार कौन है।
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मुलाकात का समय न मिलने पर चिंता का विषय
उन्होंने अपने पत्र में यह मांग भी की कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े प्रमुख सिख नेताओं को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष बुलाकर पूछा जाए कि जिस मामले में छह महीने के भीतर निर्णय होने की बात कही गई थी, वह आज 15 वर्ष बाद भी लंबित क्यों है। उन्होंने वर्ष 2019 में जारी अधिसूचना को अब तक लागू नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले के संबंध में गठित पांच सदस्यीय समिति को अब तक मुलाकात का समय नहीं मिलना भी चिंता का विषय है।
जल्द निर्णय लेने की अपील
राजोआणा ने पत्र के अंत में कहा कि वह चाहते हैं कि इस मामले में जल्द और स्पष्ट निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि उनकी याचिका भी वर्षों तक सर्वोच्च न्यायालय में लंबित रहने वाले मामलों की सूची का हिस्सा न बने। उन्होंने उम्मीद जताई कि श्री अकाल तख्त साहिब इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार कर उचित मार्गदर्शन देगा, जिससे लंबे समय से चली आ रही कानूनी और धार्मिक प्रक्रिया को स्पष्ट दिशा मिल सके।