श्री करतारपुर साहिब कारिडोर को खोलने की फिर उठी मांग, केंद्र से सिख भावनाओं का सम्मान करने की अपील
SGPC प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने केंद्र सरकार से करतारपुर साहिब कारिडोर को खोलने की अपील की है। करोड़ों श्रद्धालुओं ...और पढ़ें

पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब।
HighLights
करतारपुर साहिब कारिडोर फिर से खोलने की मांग तेज हुई।
SGPC प्रधान ने केंद्र से सिख भावनाओं का सम्मान करने को कहा।
सुरक्षा के साथ श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था का ध्यान रखने की अपील।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के लिए बने कारिडोर को खोले जाने की मांग एक बार फिर उठी है। लंबे समय से बंद रखे जाने के मुद्दे पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने केंद्र सरकार से सिख संगत की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक या राजनीतिक विषय नहीं है, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक विश्वास से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मामला है। इसलिए सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।
एडवोकेट धामी ने संसद में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री द्वारा दिए गए उस जवाब पर प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसमें फिलहाल करतारपुर साहिब मार्ग को दोबारा नहीं खोलने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि लंबे समय से मार्ग बंद रहने के कारण सिख संगत की धार्मिक भावनाओं को लगातार ठेस पहुंच रही है।
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सिखों के लिए पवित्र स्थान है श्री करतारपुर साहिब
उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब सिख इतिहास और आस्था का अत्यंत पवित्र केंद्र है। यही वह स्थान है, जहां प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए और पूरी मानवता को किरत करो, नाम जपो और वंड छको का संदेश दिया। इस कारण विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए इस पवित्र स्थान के दर्शन करना केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक आस्था का विषय है।
धामी ने कहा कि करतारपुर साहिब मार्ग ने दोनों देशों के बीच धार्मिक यात्राओं को नई दिशा दी थी। यह मार्ग केवल श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर ही नहीं देता, बल्कि शांति, भाईचारे और सद्भाव का भी प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि इस भावना को बनाए रखना दोनों देशों और समाज के हित में है।
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धार्मिक आस्था का दिया हवाला
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा हर सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लेकिन इसके साथ ही श्रद्धालुओं की धार्मिक स्वतंत्रता और उनकी आस्था का सम्मान करना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि आवश्यक हो तो सुरक्षा के अतिरिक्त प्रबंध किए जाएं, लेकिन श्रद्धालुओं को उनके पवित्र तीर्थ के दर्शन से लंबे समय तक वंचित रखना उचित नहीं है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि करतारपुर साहिब मार्ग के संबंध में शीघ्र समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की सलाह और आवश्यक व्यवस्थाओं के साथ ऐसा समाधान निकाला जा सकता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का भी सम्मान हो सके।
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