अमृतसर में प्रवासी मजदूरी को झांसा देकर अगवा किया, दो रोटी देकर 10 दिन बंधक बना कराया काम; विरोध करने पर पीटा
अमृतसर में मजदूरी का झांसा देकर महेश को अगवा कर दस दिन बंधक रखने का आरोप है। उससे जबरन काम कराया गया और मारपीट की गई। पुलिस ने उसे मुक्त कराया।

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HighLights
महेश सिंह को अमृतसर में 10 दिन बंधक बनाया गया।
उसे जबरन गोबर उठाने और चारा काटने का काम कराया।
पुलिस और कल्याण परिषद ने मिलकर मजदूर को मुक्त कराया।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। उत्तर प्रदेश के रहने वाले एक व्यक्ति से अमृतसर में दस दिन तक बंधुआ मजदूरी करवाई गई। उसे गोबर उठाया जाता था और दो मिनट आराम करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही थी। मामले की जानकारी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश कल्याण परिषद के पदाधिकारी व पुलिस मौके पर पहुंचे।
फर्रुखाबाद निवासी महेश सिंह पुत्र सिरौली पिछले करीब 25 वर्षों से गुरुद्वारा भाई मनी सिंह तरनतारन रोड के पास रहकर मजदूरी करते हैं। सात अगस्त की सुबह वह रोजाना की तरह शर्मा चौक पर मजदूरी की तलाश में गए थे।
वहां गुरुद्वारे के पास मौजूद अन्य मजदूरों के अनुसार दो अज्ञात व्यक्ति मुंह पर कपड़ा बांधकर मोटरसाइकिल पर पहुंचे और खुद को पिंड सुरसिंह से आया बताते हुए मजदूरी के लिए श्रमिक की जरूरत होने की बात कही। इसके बाद महेश उनके साथ मोटरसाइकिल पर बैठकर चला गया।
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मजदूर के मिलने के बाद पुलिस का धन्यवाद करते हुए परिषद के पदाधिकारी।
बेटे ने पहुंच तलाश की शुरू
शाम तक महेश के वापस नहीं लौटने पर मकान मालिक ने उसके बेटे विपिन कुमार को फर्रुखाबाद सूचना दी। विपिन 11 अगस्त को अमृतसर पहुंचा और पिता की तलाश शुरू की। सहयोगी मजदूरों से बातचीत के दौरान उसे पता चला कि महेश को किसी ने बंधक बना लिया है।
इसके बाद उसने थाना सी डिवीजन, गिलवाली गेट में शिकायत दी। कार्रवाई में देरी होने पर उसने उत्तर प्रदेश कल्याण परिषद के क्षेत्रीय पदाधिकारी प्रकाश से संपर्क किया।
परिषद ने दी रोष प्रदर्शन की चेतावनी
परिषद के सीनियर उप प्रधान सुखदेव पाल, महामंत्री राम भवन गोस्वामी, मोहन कुमार, रामजन्म यादव और प्रकाश सहित अन्य पदाधिकारियों ने 15 अगस्त को थाना प्रभारी रणजीत सिंह से मुलाकात कर महेश को जल्द तलाशने की मांग की।
परिषद ने 24 घंटे में तलाश न होने पर रोष प्रदर्शन की चेतावनी भी दी। इसके बाद थाना प्रभारी ने एएसआइ गुरमुख सिंह के नेतृत्व में टीम गठित की। पुलिस टीम के साथ परिषद पदाधिकारियों और महेश के बेटे विपिन ने भी तलाश में सहयोग किया।
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झब्बाल कलां से करवाया गया मुक्त
पुलिस के लगातार प्रयास के बाद महेश सिंह को झब्बाल कलां से आगे माझोपुर गांव निवासी गुरदेव सिंह के यहां से मुक्त करवाया गया। परिषद के अनुसार जब महेश को बरामद किया गया तो उसकी हालत बेहद दयनीय थी। महेश ने आरोप लगाया कि उसे लगातार दस दिन तक सुबह और शाम केवल एक-एक रोटी दी जाती थी।
दिनभर उससे चारा कटवाने और गोबर उठाने का काम कराया जाता था। थककर बैठने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी। पीड़ित के शरीर पर चोट, कट और सूजन के निशान भी बताए गए हैं।
प्रवासी भलाई बोर्ड, पंजाब सरकार के पूर्व वाइस चेयरमैन तथा उत्तर प्रदेश-बिहार कल्याण परिषद, पंजाब के जनरल सेक्रेटरी राम भवन गोस्वामी ने बताया कि पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया, लेकिन मौजूदा कानून के तहत उन्हें शाम तक जमानत मिल गई।
बंधुआ मजदूरी रोकने को सख्त कानून की मांग
गोस्वामी ने कहा कि 1976 में बंधुआ मजदूरी समाप्त करने के लिए कानून बनने के बावजूद गरीब और जरूरतमंद मजदूरों को बहला-फुसलाकर काम के नाम पर फंसाने की घटनाएं चिंता का विषय हैं।
उन्होंने इसे मानव तस्करी जैसी गंभीर प्रवृत्ति बताते हुए कानून को और सख्त बनाने की मांग की। साथ ही कंस्ट्रक्शन मजदूरों से अपील की कि वे अनजान लोगों के साथ मजदूरी के लिए जाने से पहले उनकी पूरी जानकारी जरूर जांच लें।
इस मौके पर परिषद के उप प्रधान संतोष सिंह, बृजलाल यादव, श्याम लाल, संजय सिंह, सियाराम, दविंदर कुमार, राजू सिंह और नितिन कुमार सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
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