अमृतसर सुधार ट्रस्ट के बाहर प्रदर्शन, कूड़े की ट्रालियां लेकर पहुंचे मजदूर; SDO के तबादले पर अड़े
एसडीओ शमशेर सिंह के तबादले और वेतन बढ़ाने समेत मांगों को लेकर मजदूरों ने नगर सुधार ट्रस्ट के बाहर कूड़े ...और पढ़ें

नगर सुधार ट्रस्ट के बाहर खड़ी की गईं कूड़े की ट्रालियां।
HighLights
मजदूर एक्शन कमेटी ने अमृतसर सुधार ट्रस्ट के बाहर प्रदर्शन किया।
एसडीओ शमशेर सिंह के तबादले और वेतन वृद्धि की मांग।
कूड़े से भरी ट्रालियों के साथ विरोध प्रदर्शन किया गया।
जागरण संवाददाता, अमृतसर। अमृतसर सुधार ट्रस्ट के एसडीओ शमशेर सिंह के तबादले और वेतन बढ़ाने समेत अन्य मांगों को लेकर मजदूर एक्शन कमेटी ने मोर्चा खोल दिया है। वीरवार को कमेटी के सदस्यों ने कूड़े से भरी ट्रालियां नगर सुधार ट्रस्ट के बाहर लाकर खड़ी कर दीं। इससे ट्रस्ट परिसर के बाहर माहौल तनावपूर्ण हो गया।
मजदूर एक्शन कमेटी ने पहले ही नगर सुधार ट्रस्ट के अध्यक्ष करमजीत सिंह रिंटू के घर के बाहर कूड़ा फेंकने की चेतावनी दी हुई है। प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो वे कूड़े से भरी ट्रालियां लेकर चेयरमैन के घर के बाहर पहुंचेंगे।
मामले को लेकर ट्रस्ट के बाहर धरने पर बैठे मजदूर एक्शन कमेटी के सदस्यों को डीसीपी कानून एवं व्यवस्था ने बातचीत के लिए बुलाया है। कमेटी के सदस्यों का कहना है कि बातचीत में यदि उनकी मांगों पर सहमति नहीं बनी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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एसडीओ की तैनाती का विरोध
कर्मचारी नगर सुधार ट्रस्ट में दोबारा एसडीओ शमशेर सिंह की तैनाती का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले एसडीओ ने दर्जा चार महिला कर्मचारी के साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस मामले में एसडीओ के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ था।
इसके बावजूद उन्हें दोबारा अमृतसर में तैनात किए जाने पर कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं। मजदूरों की एक अन्य प्रमुख मांग सफाई सेवकों को जारी किए गए अनुभव प्रमाणपत्रों से जुड़ी है।
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मांगों पर नहीं होती ठोस कार्रवाई
कमेटी का आरोप है कि नगर सुधार ट्रस्ट की ओर से सफाई सेवकों को जो अनुभव प्रमाणपत्र दिए गए हैं, उन पर किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं। इसके कारण इन प्रमाणपत्रों को अन्य स्थानों पर मान्यता नहीं मिल रही है और कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मजदूर एक्शन कमेटी ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा। अब प्रशासन और कमेटी के बीच होने वाली बातचीत से तय होगा कि मामला शांत होता है या आंदोलन आगे बढ़ता है।
