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    कनाडा भेजे गए गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों पर उठे विवाद पर SGPC ने तोड़ी चुप्पी, अफवाहों से सावधान रहने की अपील

    Updated: Sun, 12 Jul 2026 12:38 PM (IST)

    एसजीपीसी ने कनाडा भेजे गए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार को निराधार बताया। संस्था ने कहा कि पूरी प्रक्रिया गुरमत ...और पढ़ें

    कनाडा भेजे गए स्वरूपों से संबंधित एसजीपीसी की तरफ से जारी की गई तस्वीर।

    कनाडा भेजे गए स्वरूपों से संबंधित एसजीपीसी की तरफ से जारी की गई तस्वीर।

    HighLights

    1. SGPC ने कनाडा स्वरूप विवाद पर अपना पक्ष रखा।

    2. स्वरूप धार्मिक आवश्यकतानुसार, पूरी मर्यादा से भेजे गए।

    3. व्यापारिक लेनदेन के आरोप पूरी तरह निराधार बताए।

    जागरण संवाददाता, अमृतसर। अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने कनाडा भेजे गए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों को लेकर फैलाए जा रहे विवाद और भ्रामक प्रचार पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। एसजीपीसी ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर संगत में भ्रम की स्थिति पैदा करने और संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। कमेटी ने संगत से अपील की है कि ऐसे दुष्प्रचार से सावधान रहें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें।

    एसजीपीसी के सचिव बलविंदर सिंह काहलवां ने कहा कि कनाडा की संगत और वहां की गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों की लंबे समय से चली आ रही धार्मिक आवश्यकता तथा श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप पूरे सम्मान और गुरमत मर्यादा के अनुसार पालकी साहिब में सुशोभित कर भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान पंथक परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं का पूरी तरह पालन किया गया।

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    पारित प्रस्ताव के अनुसार अपनाई की प्रक्रिया

    उन्होंने बताया कि विदेशों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप भेजने की प्रक्रिया कोई नई नहीं है। इससे पहले भी इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, बैंकाक सहित विभिन्न देशों में धार्मिक जरूरत के आधार पर स्वरूप भेजे जाते रहे हैं। यह प्रक्रिया पांच सिंह साहिबान की ओर से 19 सितंबर 2009 को पारित प्रस्ताव तथा एसजीपीसी की आंतरिक समिति की मंजूरी के अनुसार अपनाई जाती रही है।

    एसजीपीसी सचिव ने बताया कि कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा एसोसिएशन की मांग पर एसजीपीसी की आंतरिक समिति ने 28 जुलाई 2025 को प्रस्ताव संख्या 798 के माध्यम से अनुमति प्रदान की थी। इसके बाद सभी आवश्यक धार्मिक औपचारिकताओं का पालन करते हुए पावन स्वरूप सम्मानपूर्वक वहां भेजे गए।

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    एसजीपीसी सदस्य ने व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया

    उन्होंने कहा कि स्वरूप भेजने से पहले एसजीपीसी सदस्य राजिंदर सिंह मेहता ने स्वयं कनाडा जाकर संबंधित गुरुद्वारे में की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया था। इसके अलावा एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के निर्देश पर आंतरिक समिति सदस्य बीबी हरजिंदर कौर ने भी गुरुद्वारे का दौरा कर पावन स्वरूपों के दर्शन किए और वहां की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया।

    बलविंदर सिंह काहलवां ने उन आरोपों को भी पूरी तरह निराधार बताया, जिनमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों के संबंध में व्यापार किए जाने की बात कही जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की धार्मिक आवश्यकता और संगत की मांग का परीक्षण करने के बाद ही पावन स्वरूप उपलब्ध कराए जाते हैं।

    इसके लिए किसी प्रकार की भेंट राशि या आर्थिक लेनदेन नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि व्यापार संबंधी आरोप पूरी तरह तथ्यहीन हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

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