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    पंजाब में रिटायर्ड कर्मचारियों को राहत, हाई कोर्ट ने जिला बोर्ड की सेवा को पेंशन में जोड़ने का आदेश बरकरार रखा

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 12:38 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने फैसला दिया कि जिला बोर्ड की सेवा केवल प्रोविडेंट फंड अंशदान न होने के आधार पर पेंशन से बाहर नहीं की जा सकती। पंजाब सरका ...और पढ़ें

    ये AI जनरेटेड इमेज है।

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    दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी के पेंशन अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि जिला बोर्ड के अधीन दी गई सेवा को केवल इस आधार पर पेंशन लाभ से बाहर नहीं किया जा सकता कि उस अवधि में कर्मचारी ने कान्ट्रिब्यूटरी प्रोविडेंट फंड में अंशदान नहीं किया था।  जस्टिस हरकेश मनुजा ने पंजाब सरकार की दूसरी अपील खारिज करते हुए निचली दोनों अदालतों के फैसलों को बरकरार रखा।

    मामले के अनुसार  लुधियाना निवासी हरदयाल सिंह ने 31 अगस्त 1953 से 30 सितंबर 1957 तक जिला बोर्ड के स्कूलों में सेवा दी थी। एक अक्टूबर 1957 को इन स्कूलों का पंजाब सरकार में विलय होने के बाद वह सरकारी कर्मचारी बन गए। 30 जून 1986 को सरकारी हाई स्कूल, धर्मपुरा से हेडमास्टर पद से सेवानिवृत्त होने पर उनके सेवानिवृत्ति लाभ निर्धारित करते समय जिला बोर्ड की सेवा अवधि को नहीं जोड़ा गया।

    इसके कारण उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण, जनरल प्रोविडेंट फंड, हेड मास्टर ग्रेड के लाभ तथा अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का पूरा भुगतान नहीं मिला।

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    पेंशन लाभ के खिलाफ दलील

    ट्रायल कोर्ट ने एक अगस्त 1995 को उनके पक्ष में व प्रथम अपीलीय अदालत ने भी फैसला देते हुए जिला बोर्ड की सेवा को पेंशन लाभ के लिए जोड़ने का निर्देश दिया। पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट में दलील दी कि संबंधित अवधि की सेवा पेंशन योग्य नहीं थी और कर्मचारी ने उस दौरान प्रोविडेंट फंड में कोई अंशदान भी नहीं किया था।

    सरकार ने पंजाब एजुकेशनल सर्विस  क्लास-तीन रूल्स, 1961 के नियम 13(2) का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे में पूर्व सेवा का लाभ नहीं दिया जा सकता।

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    पुरानी सेवा जोड़ने पर आपत्ति

    हाई कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि विवादित सेवा 1953 से 1957 की है, जबकि वर्ष 1961 के नियम उसके बाद लागू हुए। रिकार्ड में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे यह साबित हो कि उस समय जिला बोर्ड के कर्मचारियों के लिए कान्ट्रिब्यूटरी प्रोविडेंट फंड में अंशदान करना पेंशन के लिए अनिवार्य शर्त था। अदालत ने कहा, 'नियम 13(2) में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि कान्ट्रिब्यूटरी प्रोविडेंट फंड की सदस्यता न लेने पर पूर्व सेवा को पेंशन के लिए नहीं गिना जाएगा।

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    सरकार की यह दलील भी अदालत ने खारिज कर दी कि कर्मचारी की पूर्व सेवा एडहाक थी। हाई कोर्ट ने बिमला देवी बनाम हरियाणा राज्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि पेंशन संबंधी लाभ निर्धारित करते समय एडहाक सेवा भी गणना में शामिल की जाती है।  इसी आधार पर पंजाब सरकार की दूसरी अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया।

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