पीएसईआरसी चेयरमैन नियुक्ति पर नया विवाद, पंजाब में बाहरी चेहरों की एंट्री पर सियासी हलचल तेज
पंजाब राज्य बिजली नियामक आयोग के चेयरमैन पद के लिए हिमाचल के मुख्य सचिव का नाम सामने आने के बाद बाहरी नियुक्तियों को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। बी ...और पढ़ें

पीएसईआरसी कार्यालय।
HighLights
पीएसईआरसी चेयरमैन पद पर बाहरी अधिकारी की नियुक्ति पर विवाद।
पंजाब के संस्थानों में स्थानीय कैडर की भूमिका पर सवाल।
संजय गुप्ता, हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव, दौड़ में शामिल।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड चंडीगढ़ प्रशासन और पंजाब से जुड़े अन्य केंद्रीय संस्थानों में बाहरी अधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से चल रही बहस अब पंजाब राज्य बिजली नियामक आयोग तक पहुंच गई है। आयोग के चेयरमैन पद के लिए हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता का नाम सामने आने के बाद पंजाब के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
सवाल उठ रहे हैं कि क्या राज्य के महत्वपूर्ण संस्थानों में पंजाब कैडर और स्थानीय अधिकारियों की भूमिका लगातार सीमित होती जा रही है। 1988 बैच के गुप्ता 31 मई को रिटायर हो रहे है।
दरअसल, पंजाब पहले ही बीबीएमबी में केंद्र सरकार की नियुक्तियों को लेकर कई बार खुलकर विरोध दर्ज करा चुका है। राज्य सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया था कि पंजाब के जल और बिजली हितों से सीधे जुड़े संस्थान में राज्य की राय को नजरअंदाज कर केंद्र अपने पसंदीदा अधिकारियों को तैनात कर रहा है।
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पंजाब व केंद्र एक बार फिर आमने-सामने
बीबीएमबी में चेयरमैन और सदस्य पदों को लेकर पंजाब और केंद्र के बीच लंबे समय तक टकराव की स्थिति बनी रही थी। पंजाब सरकार ने इसे राज्य के अधिकारों में दखल तक करार दिया था। इसके अलावा चंडीगढ़ प्रशासन में भी पंजाब के अधिकारियों की घटती हिस्सेदारी का मुद्दा लगातार उठता रहा है।
कर्मचारी संगठनों और कई राजनीतिक दलों का आरोप रहा है कि साझा राजधानी होने के बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब कैडर के अधिकारियों की मौजूदगी पहले के मुकाबले काफी कम हुई है। यही वजह है कि अब पीएसईआरसी जैसे संवेदनशील बिजली नियामक संस्थान में दूसरे राज्य के वरिष्ठ अधिकारी का नाम सामने आने से पूरे मामले को पंजाब बनाम बाहरी नियुक्ति के नजरिये से देखा जा रहा है।
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सैनी संभाल रहे अतिरिक्त जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता, पूर्व पंजाब अधिकारी ए वेणु प्रसाद, अनुराग अग्रवाल, विशेष मुख्य सचिव सरवजीत सिंह और मौजूदा सदस्य आरएस सैनी चेयरमैन पद की दौड़ में शामिल हैं। आरएस सैनी फिलहाल पूर्व चेयरमैन विशवजीत खन्ना के 22 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने के बाद अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
पीएसईआरसी राज्य के बिजली सेक्टर का सबसे महत्वपूर्ण नियामक निकाय माना जाता है। आयोग बिजली दरें तय करने, बिजली खरीद समझौतों को मंजूरी देने, निजी और सरकारी बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली की निगरानी करने तथा उपभोक्ता हितों से जुड़े विवादों के समाधान की जिम्मेदारी निभाता है।
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पंजाब से सीधे तौर पर जुड़ा फैसला
किसानों को मुफ्त बिजली, उद्योगों के लिए टैरिफ, घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ और बिजली सब्सिडी जैसे संवेदनशील मामलों में भी आयोग की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। यही कारण है कि चेयरमैन पद की नियुक्ति को केवल प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि पंजाब के आर्थिक और राजनीतिक हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
रेस में शामिल ए वेणु प्रसाद बिजली क्षेत्र का अनुभवी प्रशासनिक चेहरा माने जाते हैं। वह पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) और पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसटीसीएल) के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में भी काम किया है।
अनुराग अग्रवाल भी बिजली विभाग और पूर्व पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वहीं इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले सरवजीत सिंह ने सिंचाई विभाग और बीबीएमबी से जुड़े मामलों में लंबा अनुभव हासिल किया है।
इंटरव्यू के लिए जल्द नई तरीख होगी घोषित
सूत्रों के मुताबिक, पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी को चयन प्रक्रिया की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 19 मई को प्रस्तावित इंटरव्यू फिलहाल टाल दिए गए थे और अब नई तारीख जल्द घोषित होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि सरकार इस नियुक्ति को लेकर सभी पहलुओं पर विचार कर रही है क्योंकि आने वाले समय में पंजाब का बिजली सेक्टर कई बड़ी चुनौतियों का सामना करने वाला है।
पावर सेक्टर से जुड़े जानकारों का कहना है कि राज्य पहले ही बढ़ते बिजली सब्सिडी बोझ, निजी कंपनियों की भूमिका, थर्मल प्लांट नीति और किसानों को मुफ्त बिजली जैसे मुद्दों से जूझ रहा है। ऐसे में पीएसईआरसी का अगला चेयरमैन आने वाले वर्षों में पंजाब की बिजली नीति तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। इसी कारण अब इस नियुक्ति पर पूरे राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र की नजर टिकी हुई है।