पंजाब में नशे पर नई रणनीति की तैयारी, विधानसभा समिति बोली- जेल नहीं, जरूरतमंदों को पुनर्वास केंद्र भेजें
पंजाब विधानसभा समिति ने नशे से जूझ रहे लोगों को उचित मामलों में जेल के बजाय पुनर्वास केंद्र भेजने की सिफारिश की। अवैध केंद्रों पर कार्रवाई और उपचार सु ...और पढ़ें

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HighLights
नशे से निपटने को उपचार-पुनर्वास पर जोर दे समिति।
जरूरतमंदों को जेल नहीं, पुनर्वास केंद्र भेजने की सिफारिश।
अवैध नशामुक्ति केंद्रों पर कार्रवाई की भी मांग।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब में नशे की समस्या से निपटने के लिए अब केवल कानून-व्यवस्था के नजरिये से कार्रवाई करने के बजाय उपचार और पुनर्वास पर जोर देने की जरूरत विधानसभा की समिति ने बताई है। पंजाब विधानसभा की सार्वजनिक उपक्रम समिति ने सिफारिश की है कि जहां उचित हो, नशे से जूझ रहे लोगों को जेल भेजने के बजाय पुनर्वास केंद्रों में भेजकर उनका उपचार कराया जाए।
समिति ने कहा कि नशे की समस्या को केवल अपराध से जोड़कर देखने के बजाय इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य और पुनर्वास की चुनौती के रूप में लिया जाना चाहिए। साथ ही बढ़ती नशामुक्ति सेवाओं की मांग, जेलों में ब्यूप्रेनोर्फिन की खपत और अवैध नशामुक्ति केंद्रों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
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129वीं रिपोर्ट पेश की गई
पंजाब विधानसभा में सार्वजनिक उपक्रम समिति की वर्ष 2026-27 की 129वीं रिपोर्ट पेश की गई। समिति के चेयरमैन और बठिंडा के विधायक जरूप सिंह गिल ने रिपोर्ट पेश की। 13 सदस्यीय समिति ने पंजाब हेल्थ सिस्टम्स कारपोरेशन के कामकाज, दवाओं की खरीद, स्वास्थ्य ढांचे और नशामुक्ति सेवाओं की समीक्षा की। समिति ने नशे से प्रभावित लोगों के उपचार के लिए पुनर्वास व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत बताई।
समिति ने लुधियाना सिविल अस्पताल में नशामुक्ति केंद्र की स्थिति पर भी चिंता जताई। यहां रोजाना 250 से अधिक मरीज पहुंचते हैं, जबकि केवल 15 बिस्तर उपलब्ध हैं। अमृतसर समेत कई जिलों में बिना लाइसेंस और योग्य डाक्टर व प्रशिक्षित स्टाफ के चल रहे अवैध नशामुक्ति केंद्रों पर भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
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उपचार की सुविधा बढ़ने से बढ़ी खपत
स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. बलबीर सिंह ने कहा कि जेलों में ब्यूप्रेनोर्फिन की बढ़ी खपत का कारण वहां उपचार केंद्र और ओओएटी क्लीनिक स्थापित करना है। जेलों में डाक्टर और मनोवैज्ञानिक नियुक्त किए गए हैं। कैदियों को नशे से दूर रखने के लिए खेल और कौशल विकास केंद्र भी बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले इंजेक्शन के जरिये उपचार होता था, जिसमें दुरुपयोग की आशंका रहती थी। अब ब्यूप्रेनोर्फिन गोलियों के माध्यम से उपचार किया जा रहा है।
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समिति ने अस्पतालों में आनलाइन पंजीकरण, दवाएं साल्ट नाम से लिखने, लंबे समय तक ब्यूप्रेनोर्फिन लेने वालों की निगरानी और अवैध नशामुक्ति केंद्रों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। साथ ही पुनर्वास सुविधाओं को मजबूत करने और उचित मामलों में नशे से जूझ रहे लोगों को जेल के बजाय पुनर्वास केंद्र भेजने की नीति बनाने पर जोर दिया है।