पंजाब सरकार के खिलाफ कर्मचारियों का मोर्चा, पुरानी पेंशन और महंगाई भत्ते को लेकर 22 मई को विशाल मार्च
पंजाब में कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन, महंगाई भत्ते और लंबित मांगों को लेकर 22 मई को विशाल मार्च निकालने का ऐलान किया है। नेताओं ने सरकार पर कर्म ...और पढ़ें

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HighLights
कर्मचारी महंगाई भत्ते और पुरानी पेंशन योजना पर असंतुष्ट।
22 मई को चंडीगढ़ में विशाल मार्च का ऐलान।
सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब में कर्मचारियों का असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। महंगाई भत्ते (डीए) की बकाया किस्तों, ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के अधूरे क्रियान्वयन और अन्य लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संगठनों ने सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का फैसला लिया है। इसी कड़ी में विभिन्न कर्मचारी संगठनों की अहम बैठक के बाद 22 मई को विशाल मार्च निकालने का ऐलान किया गया है।
यह मार्च मंडी बोर्ड कार्यालय से शुरू होकर वाटर सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग के दफ्तर तक निकाला जाएगा। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार लगातार कर्मचारियों को गुमराह कर रही है। हाल ही में ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर वायरल हुई चिट्ठी पर सवाल उठाते हुए नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ भ्रम फैलाने की कोशिश है।
उनका कहना है कि सरकार यह दिखाना चाहती है कि ओपीएस लागू की जा रही है, जबकि हकीकत में अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि 2022 में जारी नोटिफिकेशन के बाद भी लाखों कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है।
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डीए के मुद्दे पर सरकार को घेरा
डीए के मुद्दे पर भी कर्मचारी संगठनों ने सरकार को घेरा। उनका कहना है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद सरकार द्वारा डबल बेंच में जाना इस बात का संकेत है कि वह कर्मचारियों के हकों को लेकर गंभीर नहीं है। 25 मई को इस मामले में सुनवाई प्रस्तावित है। कर्मचारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार जहां कई बार डीए में बढ़ोतरी कर चुकी है, वहीं पंजाब में अभी भी करीब 18 प्रतिशत तक का अंतर बना हुआ है।
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आरोप- सरकार ने वादे पूरे नहीं किए
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सिर्फ नियमित कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कच्चे, आउटसोर्स और संविदा कर्मचारी भी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने चुनाव से पहले किए गए कई वादे पूरे नहीं किए। नेताओं ने कहा कि अगर अब भी सरकार नहीं चेती तो आने वाले विधानसभा चुनावों में कर्मचारी वर्ग इसका जवाब देगा।
बैठक में नेताओं ने कर्मचारियों से बड़ी संख्या में वाहन मार्च में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि अपने अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ी जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।