पंजाब के बदमाशों का 'इंटरनेशनल सिंडिकेट'! विदेश में बैठे सरगना, रंगदारी से नशा तस्करी तक फैला अपराध का जाल
पंजाब के स्थानीय गैंग अब अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार विदेश बैठे सरगना, जेलों में बंद गैंगस्टर और स्थान ...और पढ़ें

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HighLights
पंजाब के गैंग अब अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का हिस्सा।
लारेंस बिश्नोई जैसे सरगना विदेशों और जेलों से चला रहे नेटवर्क।
नशा तस्करी, रंगदारी से करोड़ों की अवैध फंडिंग।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में कभी जिला और क्षेत्रीय स्तर तक सीमित रहने वाली गैंगवार अब अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का रूप ले चुकी है। राज्य के मालवा, माझा और दोआबा क्षेत्र से उभरे कई गैंग अब विदेशों में बैठे अपने संचालकों, जेलों में बंद सरगनाओं, स्थानीय मॉड्यूल और नशा तस्करी से मिलने वाली अवैध फंडिंग के सहारे कई देशों तक सक्रिय बताए जा रहे हैं।
हाल में सामने आए अंतरराष्ट्रीय जांच के तथ्यों ने पंजाब पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों के उस आकलन को और मजबूती दी है कि राज्य के कई गैंग अब केवल स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट का हिस्सा बन चुके हैं।
लारेंस बिश्नोई इस नेटवर्क का सबसे चर्चित चेहरा है। पंजाब विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से अपराध की दुनिया में आया बिश्नोई फिलहाल गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। उसके खिलाफ पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात और चंडीगढ़ में हत्या, हत्या की साजिश, रंगदारी, अपहरण, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध सहित 70 से अधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद उसका नेटवर्क दुनिया भर की जांच एजेंसियों की निगाह में आया।
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लॉरेंस के ऑपरेशन संभालता है गोल्डी
श्री मुक्तसर साहिब का रहने वाला सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ लंबे समय से विदेश में छिपा हुआ है। भारतीय एजेंसियों के अनुसार वह विदेश से बिश्नोई गिरोह के आपरेशन संभालता रहा है। सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड, रंगदारी और कई हाई-प्रोफाइल मामलों में वह वांछित है। एफबीआई भी उसकी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित कर चुकी है। भारत सरकार ने भी आरोपित पर ईनाम घोषित कर रखा है।
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राजस्थान का रोहित गोदारा भी भारत से फरार है। जांच एजेंसियों के अनुसार वह विदेश में बैठकर रंगदारी, टारगेट किलिंग और गैंग के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का संचालन करता है। पंजाब के कई कारोबारियों और कलाकारों को विदेश से धमकियां मिलने के मामलों में भी उसका नाम सामने आया है।
जग्गू जेल में है बंद
गुरदासपुर के भगवानपुर गांव का रहने वाला जग्गू भगवानपुरिया फिलहाल पंजाब की जेल में बंद है। कभी लारेंस का करीबी रहा जग्गू बाद में उसका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी बन गया। दोनों गिरोहों की गैंगवार में कई गैंगस्टर मारे गए। उसके खिलाफ हत्या, गैंगवार, रंगदारी, हथियार और एनडीपीएस एक्ट के कई मामले दर्ज हैं।
वैंकूवर में सक्रिय रविंदर सिंह ढांडा उर्फ रोलेक्स, रैंडी और जान विक पर अमेरिका-कनाडा ड्रग कारिडोर का बड़ा संचालक होने के आरोप हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार उसका नेटवर्क ट्रकों के जरिए बड़ी मात्रा में कोकीन और मेथामफेटामाइन की तस्करी करता रहा है।
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आतंकियां व तस्करों के बीच संपर्क बढ़ा
जांच एजेंसियां मानती हैं कि वर्ष 2015 के बाद पंजाब के गैंगों का विदेशों में बैठे खालिस्तान समर्थक तत्वों और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों से संपर्क बढ़ा। 2016 की नाभा जेल ब्रेक और उसके बाद की घटनाओं ने इस गठजोड़ को और मजबूत किया। इसके बाद टारगेट किलिंग, रंगदारी, हथियारों की तस्करी, हवाला और ड्रग्स के कारोबार ने इन गैंगों को करोड़ों रुपये की फंडिंग उपलब्ध कराई।
पंजाब पुलिस का मानना है कि राज्य के विभिन्न जिलों से निकले ये गैंग अब अलग-अलग गिरोह नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क का हिस्सा हैं। जेलों में बंद सरगना, विदेशों में बैठे आपरेटर और स्थानीय माड्यूल मिलकर पंजाब में अपराध की नई संरचना तैयार कर चुके हैं, जिससे कानून-व्यवस्था के सामने लगातार बड़ी चुनौती बनी हुई है।\