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    पंजाब में बेरोजगारी भत्ता या मजाक? 21 साल बाद भी सिर्फ 150 और 200 रुपये तक सीमित

    Updated: Thu, 14 May 2026 12:07 PM (GMT+05:30)

    पंजाब में शिक्षित बेरोजगारों के लिए चल रही भत्ता योजना 21 साल बाद भी पुरानी दरों पर अटकी हुई है। कम राशि और सख्त शर्तों के कारण युवा योजना से दूरी बना ...और पढ़ें

    ये AI जनरेटेड इमेज है।

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    रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में शिक्षित बेरोजगारों के लिए शुरू की गई बेरोजगारी भत्ता योजना अब व्यवहारिक राहत के बजाय सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित होती दिख रही है। राज्य सरकार की ओर से लागू यह योजना पिछले दो दशकों में महंगाई, शिक्षा खर्च और जीवनयापन की बढ़ती लागत के बावजूद पुराने ढांचे पर ही चल रही है।

    नतीजा यह है कि बड़ी संख्या में युवा इस योजना से दूरी बनाए हुए हैं और रोजगार विशेषज्ञ भी इसे अप्रासंगिक मानने लगे हैं। राज्य के रोजगार कार्यालयों से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पंजाब पेमेंट ऑफ एंप्लॉयमेंट अलाउंस स्कीम के तहत मैट्रिक पास युवाओं को 150 रुपये और स्नातक युवाओं को 200 रुपये मासिक भत्ता देने का प्रावधान है।

    यह दरें 2005 में तय की गई थीं और उसके बाद इनमें कोई संशोधन नहीं किया गया। सरकारी स्तर पर योजना जारी है, लेकिन राशि इतनी कम है कि अधिकांश पात्र युवा आवेदन तक नहीं कर रहे।

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    पंजीकरण करवाने वालों की संख्या घटी

    रोजगार विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कई जिलों में योजना के लिए पंजीकरण कराने वालों की संख्या लगातार घट रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बेरोजगारी भत्ता लेने के लिए कई शर्तें भी युवाओं के लिए बाधा बन रही हैं।

    आवेदक के परिवार की वार्षिक आय सीमा बेहद कम तय है, परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए, पढ़ाई छोड़े कम से कम तीन वर्ष बीत चुके हों और रोजगार कार्यालय में लगातार पंजीकरण भी जरूरी है। इन शर्तों के कारण पात्रता का दायरा बहुत सीमित रह जाता है।

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    2500 रुपए देने के सिर्फ हुए वादे

    दिलचस्प यह है कि पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों ने बेरोजगार युवाओं को बड़ा आर्थिक सहारा देने के वादे किए थे। कई मंचों से बेरोजगारी भत्ता 2500 रुपये मासिक तक करने की घोषणा हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर पुरानी व्यवस्था ही कायम है। विभागीय रिकॉर्ड में योजना सक्रिय है, पर लाभार्थियों की संख्या बेहद कम होने से इसका प्रभाव नगण्य माना जा रहा है।

    पात्रता नियमों की समीक्षा जरूरी

    युवा संगठनों का कहना है कि आज के समय में 150 या 200 रुपये की राशि प्रतीकात्मक भी नहीं मानी जा सकती। उनका तर्क है कि जब राज्य में रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और कौशल प्रशिक्षण की चुनौतियां बढ़ रही हैं, तब इतनी पुरानी दरों पर चल रही योजना बेरोजगारों के लिए राहत नहीं दे सकती।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस योजना को प्रभावी बनाना चाहती है तो भत्ते की राशि के साथ पात्रता नियमों की भी समीक्षा करनी होगी। फिलहाल स्थिति यह है कि योजना बंद नहीं हुई, लेकिन उपयोगिता इतनी कम रह गई है कि इसे लेकर युवाओं में उत्साह लगभग खत्म हो चुका है।

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