फरीकोट में काॅलेज विवाद से आहत छात्र नहर में कूदा, मौत; पोस्ट डाल कर जताई पीड़ा, लाइब्रेरी इंचार्ज पर केस
फरीदकोट में एक छात्र की मौत के मामले में परिजनों ने काॅलेज कर्मचारी पर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है और घटना की परिस्थितियों का ...और पढ़ें

मृतक युवक की फाइल फोटो।
HighLights
फरीदकोट में छात्र की नहर में कूदकर मौत।
कॉलेज कर्मचारी पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया।
जागरण संवाददाता, फरीदकोट। फरीदकोट जिले के गांव सुक्खनवाला में एक स्नातक के छात्र की मौत का मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। परिजनों के आरोपों के आधार पर पुलिस ने काॅलेज के एक कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना से परिवार में शोक का माहौल है और गांव में भी दुख की लहर है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक युवक लगभग 21 वर्ष का था और जिला मोगा के एक सरकारी कालेज में प्रथम वर्ष का छात्र था। परिजनों का कहना है कि घटना वाले दिन वह रोजाना की तरह सुबह काॅलेज गया था। वहां से उसने अपने चाचा और परिवार से फोन पर बातचीत की और कुछ जरूरी औपचारिकताओं को लेकर जानकारी दी।
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फीस व पुस्तक को लेकर हुआ विवाद
परिवार का आरोप है कि काॅलेज में एक कर्मचारी के साथ उसकी बातचीत के दौरान विवाद हुआ और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। परिजनों के अनुसार युवक ने बताया था कि उससे फीस और पुस्तक से जुड़ी औपचारिकताओं को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। साथ ही उसे कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा।
परिजनों ने यह भी दावा किया कि घटना से पहले युवक ने अपने सामाजिक माध्यम पर एक संदेश साझा कर अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। इसके बाद वह घर नहीं लौटा। कई दिनों की तलाश के बाद उसका शव एक नहर से बरामद किया गया, जिससे पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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कॉलेज कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर संबंधित कालेज कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। थाना सदर पुलिस के अनुसार घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी और अन्य साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं, ताकि घटना की सही परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। वहीं, कालेज प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
यह घटना छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षण संस्थानों में व्यवहार से जुड़े मुद्दों को लेकर कई सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और समय पर समाधान बेहद जरूरी है।
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