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    फतेहगढ़ में पूजा महंत की चुनावी हुंकार ने खींचा सबका ध्यान, किन्नर समाज की पहचान के साथ विकास को बनाया मुद्दा

    Updated: Sat, 23 May 2026 07:15 AM (IST)

    बस्सी पठाना निकाय चुनाव में किन्नर प्रत्याशी पूजा महंत पहचान, सम्मान और विकास के मुद्दों के साथ चुनाव मैदान में हैं। वह शिक्षा, रोजगार और समाज में बरा ...और पढ़ें

    पूजा महंत अपने समर्थकों के साथ प्रचार करते हुए।

    पूजा महंत अपने समर्थकों के साथ प्रचार करते हुए।

    HighLights

    1. पूजा महंत बस्सी पठाना से निकाय चुनाव लड़ रही हैं।

    2. किन्नर समाज से होने के बावजूद 'महिला' के रूप में दर्ज।

    3. पहचान, सम्मान और विकास के मुद्दों पर केंद्रित चुनाव।

    नवनीत छिब्बर, बस्सी पठाना (फतेहगढ़ साहिब)। निकाय चुनावों के बीच फतेहगढ़ साहिब में बस्सी पठाना के वार्ड संख्या 13 से चुनाव लड़ रहीं शिरोमणि अकाली दल प्रत्याशी पूजा महंत इन दिनों इलाके में चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। पूजा महंत किन्नर समाज से संबंध रखती हैं, लेकिन सरकारी दस्तावेजों और मतदाता सूची में उनकी पहचान “महिला” के रूप में दर्ज है।

    यही वजह है कि उनका चुनाव केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं बल्कि पहचान, सम्मान और बराबरी की लड़ाई भी बन गया है। 53 वर्षीय पूजा महंत वर्ष 2017 में कांग्रेस से जुड़ी थीं। अब वह पहली बार शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर निकाय चुनाव लड़ रही हैं। पूजा कहती हैं कि किन्नर होने के कारण उनकी अपनी कोई संतान नहीं है और माता-पिता भी अब इस दुनिया में नहीं हैं।

    ऐसे में मोहल्ला और शहर ही उनका परिवार है। वह बताती हैं कि महंत होने के नाते वह हमेशा इलाके की खुशहाली और तरक्की की अरदास करती हैं और यदि जनता उन्हें मौका देती है तो पूरी ईमानदारी से सेवा करेंगी।

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    पूजा महंत अपने समर्थकों के साथ प्रचार करते हुए।

    साफ-सफाई व बुनियादी सुविधाएं बनी मुद्दा

    पूजा महंत का चुनावी एजेंडा साफ-सुथरा और स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित है। वह स्वच्छ पेयजल, बेहतर सफाई व्यवस्था, सीवरेज सुधार, गलियों में रोशनी, बच्चों के लिए पार्क और युवाओं को नशे से दूर रखने जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रही हैं। उनका कहना है कि कई नेता चुनाव जीतने के बाद केवल कुर्सी बचाने में व्यस्त हो जाते हैं, जबकि आम लोगों की समस्याएं पीछे छूट जाती हैं।

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    दूसरे नेताओं से अलग पूजा महंत अपने विरोधियों पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने से बचती हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने और जनता के सामने अपना पक्ष रखने का अधिकार है। अंतिम फैसला जनता ही करेगी।

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    पहचान के लिए भी लड़ रही पूजा

    बस्सी पठाना में किन्नर समाज के दो डेरे मौजूद हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उनकी अलग पहचान दर्ज नहीं है। पूजा महंत कहती हैं कि वर्ष दो हजार चौदह में सर्वोच्च न्यायालय ने किन्नरों को “तीसरे लिंग” के रूप में मान्यता दी थी और बाद में कानून भी बना, लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी पहचान की समस्या बनी हुई है।

    पूजा कहती हैं कि किन्नर समाज को शिक्षा और रोजगार में बराबर अवसर मिलने चाहिए, तभी वे समाज की मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ पाएंगे। पूजा पारंपरिक मर्यादा में रहने वाले महंतों और सड़कों पर जबरन पैसे मांगने वाले बहरूपियों के बीच अंतर करने की भी मांग उठा रही हैं।

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