गुरदासपुर में रावी दरिया का अस्थायी पुल हटने से बढ़ी मुसीबत, पलटी यात्रियों से भरी नाव; कम पानी से टला हादसा
रावी दरिया में यात्रियों से भरी नाव पलट गई, लेकिन पानी कम होने से सभी सुरक्षित बच गए। अस्थायी पुल हटने के बाद सीमावर्ती गांवों के लोग नाव के सहारे आवा ...और पढ़ें

नाव के सहारे दरिया पार करते लोग।
HighLights
गुरदासपुर में रावी दरिया में यात्रियों से भरी नाव पलटी।
कम पानी के कारण सभी यात्री सुरक्षित, बड़ा हादसा टला।
स्थायी पुल की मांग तेज, सात गांवों का संपर्क टूटा।
जागरण संवाददाता, गुरदासपुर। अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गुरदासपुर के मकौड़ा पत्तन पर शुक्रवार उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब रावी दरिया पार कर रही यात्रियों से भरी एक नाव अचानक पलट गई। नाव पलटते ही उसमें सवार लोग पानी में गिर पड़े और मौके पर चीख-पुकार मच गई। राहत की बात यह रही कि जिस स्थान पर नाव पलटी, वहां पानी का स्तर कम था। इसी कारण सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकल आए और एक बड़ा हादसा टल गया।
इस घटना ने एक बार फिर सीमावर्ती गांवों के लोगों की परेशानी और पक्के पुल की लंबे समय से चली आ रही मांग को सामने ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर दरिया पार करना पड़ता है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल सका।
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7 गांवों का टूटा संपर्क
कुछ दिन पहले रावी दरिया में जलस्तर बढ़ने के कारण मकौड़ा पत्तन पर बनाया गया अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त होकर बह गया था। इसके बाद दरिया के पार बसे सात गांवों का मुख्य मार्ग से सीधा संपर्क टूट गया। अब इन गांवों के लोगों के पास आने-जाने का एकमात्र साधन नाव ही बचा है। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
संतुलन बिगड़ने से हुआ हादसा
शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग ने अस्थायी पुल को पूरी तरह हटा दिया। इसी बीच सुबह करीब सात बजे छोटी नाव के जरिए लोग दरिया पार कर रहे थे। किनारे से कुछ दूरी पर पहुंचते ही नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गई। नाव में बैठे सभी लोग पानी में जा गिरे। आसपास मौजूद लोगों और मल्लाह की मदद से सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
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नाव चला रहे मल्लाह नछत्तर सिंह ने बताया कि छोटी नाव में एक बार में केवल पांच से सात यात्रियों को ही सुरक्षित बैठाया जा सकता है। लेकिन लोगों की मजबूरी और जल्दी पार जाने की वजह से क्षमता से अधिक लोग नाव में सवार हो गए। इसी कारण नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गई।
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बरसातों में हटाया जाता है अस्थायी पुल
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के दौरान अस्थायी पुल हटा दिया जाता है और कई महीनों तक लोगों को नाव के भरोसे रहना पड़ता है। ऐसे में किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। उनका कहना है कि प्रशासन और सरकार को इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
गांव वालों ने स्थायी पुलिस की रखी मांग
ग्रामीणों ने मांग की कि मकौड़ा पत्तन पर जल्द से जल्द पक्का पुल बनाया जाए, ताकि सीमावर्ती गांवों के हजारों लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। उनका कहना है कि सरकारें वर्षों से आश्वासन देती रही हैं, लेकिन अब तक पुल निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते पक्का पुल नहीं बनाया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।