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    दिव्यांगों की शिकायतें टालना अब पड़ेगा भारी, 3 महीने में देनी होगी कार्रवाई रिपोर्ट; पंजाब सरकार ने दिखाई सख्ती

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 07:15 AM (IST)

    पंजाब सरकार ने दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों में सभी विभागों को तीन महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट देना अनिवार्य किया है। आदेशों की अनदेखी करने वाले अध ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. दिव्यांगजनों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई अनिवार्य।

    2. तीन महीने में देनी होगी कार्रवाई रिपोर्ट।

    3. लापरवाही पर विभागों की बढ़ेगी जवाबदेही।

    संवाद सहयोगी, होशियारपुर। पंजाब सरकार ने दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा और उनकी शिकायतों के समयबद्ध निपटारे को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग (डिसेबिलिटी सेल) द्वारा जारी महत्वपूर्ण निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों, शैक्षणिक संस्थानों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि दिव्यांगों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    जारी पत्र के अनुसार राइट्स आफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटी एक्ट, 2016 (आरपीडब्ल्यूडी एक्ट-2016) के तहत राज्य दिव्यांगजन कमिश्नर द्वारा जारी किए गए आदेशों, सिफारिशों और नोटिसों का निर्धारित समय सीमा के भीतर पालन करना सभी विभागों के लिए अनिवार्य होगा। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के प्रमुखों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

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    कार्रवाई रिपोर्ट भेजना अब जरूरी

    सरकारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि राज्य दिव्यांगजन कमिश्नर किसी विभाग, बोर्ड, कारर्पोरेशन, विश्वविद्यालय या अन्य सरकारी संस्था को किसी शिकायत अथवा मामले के संबंध में सिफारिश या निर्देश जारी करता है, तो संबंधित प्राधिकरण को तीन महीने के भीतर उस पर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

    यह रिपोर्ट सीधे राज्य कमिश्नर कार्यालय को भेजी जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाए गए कदम प्रभावी रूप से लागू हो रहे हैं। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि यदि किसी विभाग को किसी विशेष कारणवश कमिश्नर की सिफारिश स्वीकार करने में कठिनाई होती है या वह उस पर अमल नहीं कर सकता, तो ऐसी स्थिति में संबंधित विभाग को तीन महीने की निर्धारित अवधि के भीतर अपना पक्ष लिखित रूप से स्पष्ट करना होगा।

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    लापरवाही पर विभागों की बढ़ेगी जवाबदेही

    इसके साथ ही सिफारिश न मानने के कारणों की जानकारी राज्य कमिश्नर और शिकायतकर्ता अथवा प्रभावित दिव्यांग व्यक्ति दोनों को उपलब्ध करवानी होगी।
    पंजाब सरकार ने सभी विभागों को यह भी निर्देश दिया है कि दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों को केवल औपचारिकता के तौर पर न देखा जाए, बल्कि उन्हें संवेदनशीलता, गंभीरता और प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।

    सरकार का मानना है कि दिव्यांगजन समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें कानून द्वारा प्रदत्त सभी अधिकारों का लाभ समय पर मिलना चाहिए। किसी भी पात्र व्यक्ति को प्रशासनिक देरी, उदासीनता या प्रक्रियागत बाधाओं के कारण उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

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    समयबद्ध कार्रवाई अब सभी पर अनिवार्य

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से राज्य में दिव्यांगजनों की शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। साथ ही विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी भी तय होगी, जिससे शिकायतों को लंबे समय तक लंबित रखने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।

    सरकार ने अपने निर्देशों में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि राज्य दिव्यांगजन कमिश्नर के आदेशों और सिफारिशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों या विभागों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में अब सभी विभागों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे दिव्यांगजनों से संबंधित मामलों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें और तीन महीने के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने की प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करें।

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