पटियाला की समाना विधानसभा में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति गरमाई; दो दिग्गजों में टिकट को लेकर खींचतान
पटियाला की समाना विधानसभा सीट पर 2027 चुनाव के लिए कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति गरमा गई है। पूर्व विधायक काका राजिंदर सिंह अपनी वापसी की कोशिश में हैं, ...और पढ़ें

पूर्व विधायक काका राजिंदर सिंह।
HighLights
समाना में 2027 चुनाव के लिए कांग्रेस टिकट पर खींचतान।
पूर्व विधायक काका राजिंदर सिंह टिकट के प्रबल दावेदार।
गुरशरण कौर रंधावा ने बढ़ाई सक्रियता, मजबूत चुनौती पेश की।
जागरण संवाददाता, पटियाला। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए अभी समय शेष है, लेकिन समाना विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पूरी तरह गरमा चुकी है। यहां कांग्रेस के दो दिग्गज चेहरों के बीच टिकट को लेकर खींचतान साफ नजर आने लगी है। एक तरफ पूर्व विधायक काका राजिंदर सिंह अपनी पुरानी जमीन वापस पाने के लिए ताल ठोक रहे हैं, तो दूसरी तरफ पटियाला ग्रामीण कांग्रेस की नवनियुक्त प्रधान गुरशरण कौर रंधावा ने अपनी सक्रियता बढ़ाकर समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
काका राजिंदर सिंह, जो पूर्व कैबिनेट मंत्री लाल सिंह के पुत्र हैं, समाना की राजनीति का एक बड़ा नाम रहे हैं।वर्ष 2017 में उन्होंने समाना से शानदार जीत दर्ज की थी और विधानसभा पहुंचे थे। हालांकि, 2022 की आम आदमी पार्टी की लहर में उन्हें आम आदमी पार्टी के चेतन सिंह जौड़ामाजरा से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। बहरहाल हार के बावजूद काका राजिंदर लगातार हलके में सक्रिय हैं।
उनका दावा है कि क्षेत्र की जनता आज भी उनके कार्यकाल के विकास कार्यों को याद कर रही है और वे ही कांग्रेस के सबसे मजबूत दावेदार हैं।
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रंधावा को नई जिम्मेदारी
टिकट की इस दौड़ में गुरशरण कौर रंधावा एक मजबूत चुनौती बनकर उभरी हैं। पंजाब महिला कांग्रेस की पूर्व प्रधान रह चुकीं रंधावा को हाल ही में पटियाला ग्रामीण कांग्रेस का प्रधान नियुक्त किया गया है, जिससे उनके राजनीतिक कद में इजाफा हुआ है। रंधावा इन दिनों सोशल मीडिया पर खासी सक्रिय हैं।
उनके पोस्ट और वीडियो सीधे तौर पर समाना की जनता के मुद्दों से जुड़े होते हैं, जिससे युवाओं और महिला वोटर्स के बीच उनकी पकड़ मजबूत हो रही है। रंधावा ने हलके में अपनी जनसभाएं और मेल-मिलाप का सिलसिला भी तेज कर दिया है, जिसे राजनीति के जानकार टिकट के लिए दावेदारी के रूप में देख रहे हैं।
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दिलचस्प बने समीकरण
समाना में मुकाबला अब केवल विपक्ष बनाम सत्तापक्ष नहीं रह गया है, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी यह वर्चस्व की लड़ाई बन चुका है। जहां काका राजिंदर अपने पारिवारिक राजनीतिक रसूख और पूर्व विधायक होने के अनुभव का हवाला दे रहे हैं, वहीं गुरशरण कौर रंधावा एक नए और महिला नेतृत्व के विकल्प के रूप में खुद को पेश कर रही हैं।
उधर वर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा की मजबूत स्थिति को देखते हुए कांग्रेस के लिए सही प्रत्याशी का चयन करना एक बड़ी चुनौती होगी।
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