विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अब टलेंगे ट्रेन हादसे! पटियाला में दौड़ा भारत का पहला AI इंजन, पलक झपकते पकड़ेगा खराबी

Published: Wed, 16 Sep 2026 12:29 PM (IST)

पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स ने एआई आधारित ओएचई मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस देश का पहला इंजन तैयार किया है। यह प्रणाली ...और पढ़ें

पटियाला से रवाना होते हुए AI इंजन।

पटियाला से रवाना होते हुए AI इंजन।

HighLights

  1. पटियाला में भारत का पहला AI-पावर्ड रेल इंजन लॉन्च।

  2. OHE मॉनिटरिंग सिस्टम से रियल-टाइम में खराबी की पहचान।

  3. रेल हादसों और देरी को कम कर बढ़ाएगा सुरक्षा।

दीपक मौदगिल, पटियाला। भारतीय रेलवे ने आधुनिक तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित 'ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) मॉनिटरिंग सिस्टम' से लैस देश के पहले एआई पावर्ड रेल इंजन (लोकोमोटिव नंबर 39642) का निर्माण पूरा कर लिया है।

भारतीय रेलवे की किसी भी उत्पादन इकाई द्वारा तैयार किया गया यह अपनी तरह का पहला अनोखा इंजन है। इस ऐतिहासिक एआई पावर्ड लोकोमोटिव को पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स की वरिष्ठ महिला कर्मचारी और तकनीशियन नीलम देवी ने प्रधान मुख्य प्रशासनिक अधिकारी एस.के. श्रीवास्तव की मौजूदगी में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान कार्यशाला के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी परिषद के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

AI engine green flag

इंजन को रवाना करते हुए अधिकारी।

यह भी पढ़ें- राहुल गांधी के दौरे से पहले सचिन पायलट का नया फॉर्मूला, पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी जंग खत्म करने का प्लान तैयार!

खतरे को पलभर में भांप लेगा AI इंजन

समारोह को संबोधित करते हुए प्रधान मुख्य प्रशासनिक अधिकारी एस.के. श्रीवास्तव ने बताया कि यह इंजन शक्तिशाली पैसेंजर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव डब्ल्यूपी-7 श्रेणी में तैयार किया गया है। इसमें लगे आधुनिक एआई सेंसर बिजली के तारों (ओएचई) और रेल पटरियों की लाइव निगरानी करेंगे।

यात्रा के दौरान तारों में होने वाली स्पार्किंग, ढीले या खराब पार्ट्स, कैटेनरी स्ट्रैंड्स का टूटना, खंभों पर पक्षियों के घोंसले और ट्रैक के आसपास लगे पेड़-पौधों के झुरमुट का यह सिस्टम तुरंत पता लगा लेगा।

समय की होगी बचत

यह एआई सिस्टम खराबी होने से पहले ही उसकी सटीक जानकारी मेंटेनेंस टीम तक पहुंचा देगा, जिससे समय रहते बचाव कार्य किए जा सकेंगे। इस पूर्वानुमानित रखरखाव तकनीक से शॉर्ट-सर्किट, बिजली ट्रिपिंग और ओएचई ब्रेकडाउन के कारण होने वाली रेल दुर्घटनाओं पर रोक लगेगी।

इसके साथ ही ट्रेनों की देरी और परिचालन में आने वाली बाधाओं में भारी कमी आएगी। यह कदम भारतीय रेलवे के संचालन को बेहद सुरक्षित और आधुनिक बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

यह भी पढ़ें- पंजाब बिजली संकट: रोपड़ थर्मल का तीसरा यूनिट भी हुआ ठप, मात्र 120MW तक सीमित हुआ उत्पादन; बढ़ेंगी मुश्किलें!

AI पावर्ड लोकोमोटिव इंजन के प्रमुख फायदे:

  • रियल-टाइम मॉनिटरिंग: यह इंजन पटरियों और बिजली की ओवरहेड लाइनों (OHE) की लाइव निगरानी करता है, जिससे किसी भी खराबी का तुरंत पता चल जाता है।
  • हादसों और स्पार्किंग से सुरक्षा: बिजली के तारों में होने वाली आर्किंग (स्पार्किंग), तारों का ढीला होना या टूटना और खंभों पर बने पक्षियों के घोंसलों को समय रहते पहचानकर बड़े रेल हादसों को रोकता है।
  • सटीक डायग्नोस्टिक्स: पारंपरिक इंजनों की तुलना में यह सिस्टम सटीक डेटा तैयार करता है, जिससे मेंटेनेंस टीम को खराबी की सही लोकेशन तुरंत मिल जाती है।
  • समय की बचत: खराबी की जल्दी पहचान और मरम्मत होने से ओएचई ब्रेकडाउन के कारण होने वाली ट्रेनों की देरी में भारी कमी आएगी।
  • सफर में निरंतरता: ट्रेनों के अचानक रुकने या ट्रिपिंग की समस्याओं में कमी आने से रेल परिचालन सुचारू और यात्रियों का सफर अधिक सुरक्षित बनेगा।

यह भी पढ़ें- 'यह 100% खारिज होने का मामला', जमानत मांग रहे पंजाब के पूर्व DIG भुल्लर को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत