पंजाब के सहायता प्राप्त स्कूल अध्यापक वेतन और पेंशन में देरी से भड़के, धूरी में 9 मई को रोष मार्च
पंजाब में वेतन और पेंशन में देरी से नाराज अध्यापकों ने नौ मई को धूरी में रोष मार्च का एलान किया है। मांगें पूरी न होने पर बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी ...और पढ़ें

बैठक में मौजूद अध्यापक व कर्मचारी।
HighLights
वेतन और पेंशन ग्रांट में 11 माह की देरी।
9 मई को धूरी में विशाल रोष प्रदर्शन।
एडेड स्टाफ को सरकारी सुविधाएं देने की मांग।
जागरण संवाददाता, पटियाला। पंजाब स्टेट एडेड स्कूल टीचर्स एंड अदर इंप्लाइज यूनियन पंजाब-1967 द्वारा सूबा प्रधान गुरमीत सिंह मदनीपुर और जनरल सचिव शरणजीत सिंह कादीमाजरा के नेतृत्व में मीटिंग हुई। मीटिंग में यूनियन ने सरकार के नकारात्मक रवैये और लंबित पड़ी मांगों के विरोध में आगामी नौ मई को मुख्यमंत्री के चुनाव क्षेत्र धूरी में एक रोष प्रदर्शन और रोष मार्च निकालने का फैसला किया है।
यूनियन के नेताओं ने बताया कि आजादी से पहले के चल रहे इन एडेड स्कूलों को साल 1967 में दिल्ली पैटर्न पर ग्रांट-इन-एड स्कीम के अधीन लाया गया था। आम आदमी पार्टी ने चुनावों के दौरान वादा किया था कि एडेड स्टाफ को सरकारी कर्मचारियों के बराबर सुविधाएं दी जाएंगी, पर आज स्थिति यह है कि कई जिलों में पिछले 11 महीनों से वेतन की ग्रांट जारी नहीं हुई।
पूरे पंजाब में जनवरी से मार्च 2026 तक की ग्रांट पेंडिंग पड़ी है, जिसके कारण कर्मचारियों के घरों में चूल्हे जलने भी मुश्किल हो गए हैं।
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विभागीय स्तर पर हो रही देरी
यूनियन नेताओं ने कहा कि विभागीय स्तर पर हो रही देरी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त रोष का ही नतीजा इस विशाल रोष प्रदर्शन के रूप में सामने आ रहा है। यूनियन के नेताओं ने कहा कि यदि म मई से पहले सरकार ने उनकी ग्रांटें जारी न कीं और कोई सार्थक हल न निकाला, तो हजारों की संख्या में महिला स्टाफ और रिटायर्ड कर्मचारी धूरी की सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
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जानें मुख्य मांगें और रोष के मुख्य कारण
- जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 तक की ग्रांट तुरंत जारी की जाए। साथ ही साथ सभी रिटायर्ड अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों के पीपीओ भी तुरंत जारी किए जाएं।
- चुनाव मैनिफेस्टो के अनुसार एडेड स्टाफ को सरकारी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं।
- यूनियन द्वारा 09-04-2026 को भेजे गए खून से लिखे मांग पत्र पर कोई भी कार्रवाई न होना बेहद निराशाजनक है।
- शिक्षा और वित्त विभाग द्वारा पेंशनरों को साल-साल से भी अधिक समय हो जाने के बावजूद भी पीपीओ जारी न होना।
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