नवांशहर ब्लाक समिति चुनाव चौथी बार रद्द; बहुमत के बावजूद सत्ता से दूर कांग्रेस, सड़क पर उतरे कार्यकर्ता
नवांशहर में ब्लाक समिति चुनाव चौथी बार रद्द होने पर कांग्रेस ने विरोध किया। बहुमत के बावजूद चुनाव न होने पर प्रशासन पर पक्षपात के आरोप लगे, जबकि नेताओ ...और पढ़ें

कांग्रेस नेता सड़क पर प्रदर्शन करते हुए।
ऋषि चंद्र, नवांशहर। ब्लाक समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव लगातार चौथी बार रद्द होने के बाद नवांशहर की राजनीति में उबाल आ गया है। इस घटनाक्रम से जहां स्थानीय राजनीतिक माहौल गर्मा गया है, वहीं प्रशासन की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चुनाव प्रक्रिया बार-बार टलने से नाराज कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व विधायक अंगद सिंह और जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय मंगूपुर ने किया। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहा है और जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया को बाधित किया जा रहा है। उनका कहना था कि ब्लाक समिति में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है, इसके बावजूद उन्हें सत्ता में आने से रोका जा रहा है।
जानकारी के अनुसार समिति में कांग्रेस के 15 सदस्य हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के 5, बहुजन समाज पार्टी के 3 और शिरोमणि अकाली दल के 2 सदस्य हैं। इस गणित के आधार पर कांग्रेस का अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा था, लेकिन लगातार चुनाव रद्द होने से विवाद गहरा गया है। अंगद सिंह ने कहा कि यह लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संभावित हार से डरकर प्रशासन का सहारा ले रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर उपमंडल अधिकारी पहुंचीं, लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के चुनाव करवाए बिना ही लौट गईं।
यह भी पढ़ें- मोगा में साढ़े 3 करोड़ की हेरोइन के साथ चार गिरफ्तार; कार जब्त, सप्लाई नेटवर्क खंगाल रही पुलिस
निष्पक्ष चुनाव न करवाने के आरोप
वहीं अजय मंगूपुर ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही निष्पक्ष तरीके से चुनाव नहीं करवाए गए, तो कांग्रेस बड़ा आंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की अपील की।
खबरें और भी
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रशासन के रवैये पर रोष जताया। उनका कहना था कि यह केवल एक चुनाव का मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का प्रश्न है। स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। पुलिस अधीक्षक सरबजीत वाहिया खुद मौके पर मौजूद रहे और विभिन्न थानों से अतिरिक्त बल तैनात किया गया।
हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है कि चुनाव प्रक्रिया कब पूरी करवाई जाएगी।
यह भी पढ़ें- चंडीगढ़ में पंजाब रोडवेज की वर्कशाॅप को कुर्क करने का आदेश, Court का फैसला न मानना पड़ा भारी
बहुमत के बावजूद अध्यक्ष नहीं
जब किसी दल के पास स्पष्ट बहुमत हो, तब भी चुनाव न होना कई सवाल खड़े करता है। इससे प्रशासन की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर संदेह गहराता है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द चुनाव नहीं हुए तो आंदोलन तेज किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।