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    चन्नी के घर में बंद कमरे में मंथन, राजा वड़िंग के नेतृत्व पर उठे सवाल; पंजाब कांग्रेस में बढ़ी सियासी हलचल

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 02:25 PM (IST)

    पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक फेरबदल के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के मोरिंडा स्थित आवास पर वरिष्ठ नेताओं की बंद कमरे में बैठक हुई। बैठक म ...और पढ़ें

    चरणजीत सिंह चन्नी के निवास के बाहर एकत्रित भीड़।

    चरणजीत सिंह चन्नी के निवास के बाहर एकत्रित भीड़।

    HighLights

    1. चन्नी के मोरिंडा आवास पर कांग्रेस नेताओं की बैठक।

    2. संगठनात्मक फेरबदल के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ा।

    3. राजा वड़िंग के नेतृत्व पर उठाए गए गंभीर सवाल।

    जागरण संवाददाता, मोरिंडा (रुपनगर)। पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल के बाद शुरू हुआ असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। कांग्रेस हाईकमान की ओर से घोषित नए संगठनात्मक ढांचे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के मोरिंडा स्थित आवास पर लगातार दूसरे दिन वरिष्ठ नेताओं की बंद कमरे में बैठक हुई।

    बैठक में मौजूदा विधायक, पूर्व विधायक, विधानसभा क्षेत्र प्रभारी और कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने भाग लिया। इस बैठक को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दरअसल, कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब संगठन में फेरबदल करते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और प्रताप सिंह बाजवा को नेता प्रतिपक्ष के पद पर बरकरार रखा है। इसके साथ ही संगठन में विभिन्न गुटों को प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से चार नई समितियों का गठन किया गया है। वहीं चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।

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    चन्नी प्रधान पद के थे मजबूत दावेदार

    राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि चन्नी इस बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के सबसे मजबूत दावेदार थे। ऐसे में हाईकमान के फैसले के बाद पार्टी के एक वर्ग में असंतोष की चर्चा तेज हो गई। नई समितियों में शामिल किए गए कई नेताओं की ओर से अब तक सार्वजनिक रूप से हाईकमान का स्वागत नहीं किए जाने को भी इसी असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।

    बैठक में पहुंचने से पहले पूर्व मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पंजाब की जनता चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में देखना चाहती थी। उन्होंने कहा कि मोरिंडा में जुटे सभी नेता सामूहिक रूप से विचार-विमर्श करेंगे और जो निर्णय लिया जाएगा, उसी के अनुसार आगे की राजनीतिक रणनीति तय होगी।

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    वड़िंग के नेतृत्व पर सवाल

    वहीं पूर्व विधायक दर्शन सिंह बराड़ ने प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह उनके नेतृत्व में काम नहीं कर सकते। दूसरी ओर पूर्व विधायक लखबीर सिंह लखा ने कहा कि बैठक का उद्देश्य पंजाब में कांग्रेस को मजबूत करना और भविष्य की रणनीति तैयार करना है।

    बैठक में पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह, भारत भूषण आशु, गुरप्रीत सिंह कांगड़, पूर्व उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी, पूर्व मंत्री गुरकिरत सिंह कोटली, विधायक त्रिप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया, कुलदीप सिंह काला ढिल्लों सहित अनेक विधायक, पूर्व विधायक, विधानसभा क्षेत्र प्रभारी और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा पूर्व सांसद मोहम्मद सादिक, अंगद सैनी, बलकौर सिंह सिद्धू, वरिंदर सिंह ढिल्लों तथा कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी बैठक में भाग लिया।

    बैठक के मुद्दे नहीं किए गए सार्वजनिक

    पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक में संगठनात्मक फेरबदल, आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति और कार्यकर्ताओं की नाराजगी सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। हालांकि बैठक समाप्त होने तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव या निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया था।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस हाईकमान समय रहते असंतुष्ट नेताओं से संवाद स्थापित नहीं करता तो चुनाव से पहले पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी संगठनात्मक एकजुटता के लिए चुनौती बन सकती है। फिलहाल पंजाब कांग्रेस की नजरें मोरिंडा की इस बैठक के बाद सामने आने वाले राजनीतिक संकेतों पर टिकी हुई हैं।

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