नशे के खिलाफ आवाज उठाने की सजा! संगरूर DC ऑफिस के बाहर युवक ने निगला जहर, सचिन पायलट ने घेरी पंजाब सरकार
संगरूर में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति द्वारा जहर खाने और किसान की आत्महत्या के बाद राजनीतिक हड़कंप ...और पढ़ें
HighLights
संगरूर में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवक ने जहर खाया।
कांग्रेस ने पंजाब सरकार पर नशे के मुद्दे पर सवाल उठाए।
सचिन पायलट ने नशे के खिलाफ बोलने वालों की सुरक्षा पर चिंता जताई।
डिजिटल डेस्क, संगरूर। पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। संगरूर के नामोल गांव निवासी जग्गा सिंह ने सोमवार को डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। उसे तत्काल सरकारी अस्पताल संगरूर ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत को देखते हुए दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
घटना के बाद कांग्रेस ने वीडियो जारी कर पंजाब सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने इस घटना को लेकर पंजाब सरकार पर निशाना साधा। पायलट ने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर दबाव और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार की यह घटना गंभीर सवाल खड़े करती है। सचिन पायलट ने अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर लिखा-
पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के साथ किस तरह का दबाव और दुर्व्यवहार किया जा रहा है। संगरूर की यह घटना साफ दिखा रही है। नामोल गांव के निवासी जग्गा सिंह ने DC कार्यालय के बाहर जहरीला पदार्थ निगल लिया। नशे के खिलाफ वीडियो डालने के बाद से उन्हें धमकियां मिल रही थी और प्रताड़ित किया जा रहा था। नशामुक्त पंजाब को लेकर बड़े-बड़े दावों के बीच ऐसी घटनाओं ने AAP सरकार और प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है- अगर नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति ही सुरक्षित नहीं हैं, तो किस बदलाव की बात हो रही है?
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अर्धबेहोशी हालत में लाया गया अस्पताल
सिविल अस्पताल संगरूर के डाॅक्टर के अनुसार, मरीज को जहरीला पदार्थ खाने के बाद अस्पताल लाया गया था। जांच के दौरान वह बेहोश था और उसे बेचैनी थी। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार दिया और जहरीले पदार्थ से संबंधित नमूना लिया।
ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ा हुआ होने के कारण चिकित्सक से भी सलाह ली गई। प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को आगे के उपचार के लिए रेफर किया गया। अस्पताल प्रबंधन की ओर से पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की सूचना दी गई।
कुछ दिन पहले भी गरमाया था मामला
संगरूर में नशे के मुद्दे को लेकर इससे पहले भी एक अलग घटना राजनीतिक विवाद का कारण बनी थी। तुर बंजारा गांव निवासी गुलजार सिंह की जहरीला पदार्थ खाने के बाद मौत हो गई थी। परिवार ने आरोप लगाया था कि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से गांव में नशे की समस्या को लेकर सवाल करने के बाद गुलजार पर दबाव बनाया गया और उसे कथित तौर पर धमकाया गया।
पुलिस ने इस मामले में सरपंच, उसके पति और दो पंचायत सदस्यों समेत पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया था।
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चीमा ने आरोपों को बताया था साजिश
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बाद में अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर उन्हें फंसाने के लिए राजनीतिक विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जांच पूरी होने के बाद वह अपने पक्ष में मौजूद साक्ष्य सामने रखेंगे। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल भी बनाया गया था।
नशे के मुद्दे पर पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। भाजपा ने 18 सितंबर से प्रदेश के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने वाली नशामुक्त पंजाब यात्राएं शुरू की हैं। ऐसे में संगरूर की ताजा घटना ने नशे और सरकार की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है।
