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    तरनतारन में बंद चीनी मिल पर विवाद; रिहा हुए किसानों का प्रदर्शन, पुडा-पनग्रेन को जमीन देने के फैसले का विरोध

    Updated: Sun, 01 Mar 2026 05:19 PM (IST)

    तरनतारन के शेरों गांव की बंद चीनी मिल को लेकर गिरफ्तार 17 किसान नेताओं को रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद किसानों ने मिल की जमीन बचाने और आंदोलन तेज कर ...और पढ़ें

    चीनी मिल को लेकर प्रदर्शन करते हुए किसान।

    चीनी मिल को लेकर प्रदर्शन करते हुए किसान।

    HighLights

    1. बंद चीनी मिल की जमीन बचाने को किसानों का संघर्ष जारी।

    2. गिरफ्तार 17 किसान रिहा, आंदोलन तेज करने की घोषणा की।

    3. पुडा-पनग्रेन को जमीन आवंटन का किसान कर रहे विरोध।

    जागरण संवाददाता, तरनतारन। पंजाब के तरनतारन में गांव शेरों स्थित बंद पड़ी चीनी मिल को दोबारा चालू करवाने और मिल की जमीन बचाने को लेकर किसान संगठनों का संघर्ष लगातार जारी है। इसी क्रम में धरना दे रहे 17 किसानों को वीरवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

    तीसरे दिन प्रशासन ने सभी किसानों को केंद्रीय जेल गोइंदवाल साहिब से रिहा कर दिया। रिहा होते ही किसान नेताओं ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान कर दिया। रिहाई के मौके पर किसान नेता गुरप्रीत सिंह गंडीविंड, सुलखन सिंह तुड़ और डा. अमरजीत सिंह ने कहा कि गांव शेरों की चीनी मिल को घाटे का हवाला देकर बंद किया गया था।

    इसके बाद मिल की मशीनरी भी उखाड़ ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मिल की जमीन में किसानों की करीब 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है, लेकिन सरकार इस हिस्सेदारी को नजरअंदाज कर जमीन अलग-अलग विभागों को अलाट कर रही है।

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    बिना सहमति निर्णय लेने का विरोध

    किसान नेताओं के अनुसार 57 एकड़ जमीन पुडा को अलाट कर वहां कालोनी बनाने की योजना है, जबकि 15 एकड़ जमीन पनग्रेन को दी गई है। इसके अलावा चार एकड़ जमीन पर सीआइए स्टाफ की इमारत बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। किसानों का आरोप है कि यह फैसला उनकी सहमति के बिना लिया गया है और इससे उनकी आजीविका पर असर पड़ेगा।

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    किसानों का ऐलान, संघर्ष जारी रहेगा

    सरकार की इस नीति के विरोध में किसान संगठनों ने मिल परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। वीरवार को पुलिस ने धरना स्थल से 17 किसान नेताओं को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी।

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    अब रिहाई के बाद किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक मिल को दोबारा चालू करने और जमीन के मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से बातचीत के लिए आगे आने की अपील की है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

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