अपरा एकादशी 2026: ज्योतिषाचार्य के अनुसार आज के दिन ऐसे पाएं अनजाने पापों और पितृ दोष से मुक्ति
आज के शुभ दिन अनजाने पापों और पितृ दोष से मुक्ति पाने के सरल ज्योतिष उपाय पढ़ें। जानें भगवान विष्णु की कृपा और विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ से कैसे टलेंगे ...और पढ़ें

अपरा एकादशी पर करें सरल ज्योतिष उपाय (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज अपरा एकादशी है। हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत महत्व है, लेकिन 'अपरा' शब्द का अर्थ ही होता है 'अपार' यानी वो व्रत जिसे करने से आपको अपार पुण्य और खुशियां मिलें।
अक्सर हमें महसूस होता है कि हम अपनी तरफ से पूरी मेहनत कर रहे हैं, फिर भी जीवन में तरक्की नहीं हो रही या घर में कलह बनी रहती है। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो यह कई बार अनजाने में हुए पापों या 'पितृ दोष' की वजह से हो सकता है। आज का दिन इन्हीं समस्याओं की 'छुट्टी' करने का है।
ज्योतिष का क्या कहना है?
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिष चंद्रेश शर्मा के अनुसार, एकादशी की तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। अपरा एकादशी का व्रत रखने से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है, बल्कि इसके कई आध्यात्मिक लाभ भी हैं। विशेष रूप से, इस व्रत को करने से जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है।

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यदि कोई व्यक्ति पितृ दोष से पीड़ित है, तो उसे इस व्रत के प्रभाव से शांति प्राप्त होती है। एकादशी के पावन दिन पर व्रत रखना और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ (Vishnu Sahasranamam Path) करना बहुत ही मंगलकारी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि पूरी श्रद्धा से किए गए इस पाठ और व्रत से बड़े से बड़े कष्ट भी टल जाते हैं और जीवन में खुशहाली आती है।
आज के दिन क्या करें? (Puja Vidhi)
अगर आप आज व्रत रख रहे हैं या सिर्फ पूजा करना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- आज के दिन भगवान विष्णु के 1000 नामों (विष्णु सहस्त्रनाम) का पाठ करना जादुई असर दिखाता है। अगर आप खुद नहीं पढ़ सकते, तो मोबाइल पर इसे सुन भी सकते हैं।
- अगर कुंडली में पितृ दोष है, तो आज के दिन जल में काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को याद करें। इससे उन्हें शांति मिलती है।
- आज के दिन सामर्थ्य अनुसार अनाज, जल या कपड़ों का दान जरूर करें।
सेहत और अध्यात्म का मेल
व्रत का मतलब सिर्फ भूखा रहना नहीं है। यह हमारे शरीर को 'डिटॉक्स' करने का तरीका भी है। फल और जल पर रहकर जब हम भगवान का ध्यान करते हैं, तो मानसिक तनाव अपने आप कम होने लगता है। एकादशी के दिन चावल खाने से परहेज करना चाहिए। शास्त्रों में एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।