Kamada Ekadashi Katha: जन्म-जन्मांतर के पापों से मिलेगी मुक्ति, एकादशी के दिन करें इस कथा का पाठ
वैदिक पंचांग के अनुसार, 29 मार्च को कामदा एकादशी व्रत किया जा रहा है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत और पूजा से सभी पापों से मुक्ति म ...और पढ़ें

जरूर करें इस कथा का पाठ (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 29 मार्च (Kamada Ekadashi 2026 Date) को कामदा एकादशी व्रत किया जा रहा है। यह तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और जीवन में आ रहे दुख-दर्द दूर होते हैं। आइए पढ़ते हैं कामदा एकादशी (Kamada Ekadashi Katha in Hindi) की व्रत कथा।
कामदा एकादशी व्रत कथा (Kamada Ekadashi Vrat Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में भोगीपुर गांव में पुंडरीक नाम का राजा रहता था। वह सदैव भोग-विलास में लिप्त रहता था। उसके गांव में ललित और ललिता के नाम पुरुष और महिला रहती थी। एक बार का समय था, जब राजा के दरबार में ललित गीत गायन कर रहा था। इस दौरान उसका ध्यान ललिता पर चला गया, जिसकी वजह से उसके गीत का स्वर बिगड़ गया। इस दृश्य को देख राजा क्रोधित हुआ। इसके बाद राजा ने ललित को राक्षस बनने का श्राप दे दिया। वहीं, इस श्राप की वजह से ललिता परेशान हो गई और गांव के लोगों से मदद मांगी।
ललिता अपने की पति की मदद के लिए श्रृंगी ऋषि के आश्रम में पहुंची। उन्होंने अपने के बारे में बताया। ऋषि ने ललिता को कामदा एकादशी व्रत करने की सलाह दी। ऋषि ने कहा कि इस व्रत को करने से तुम्हारा पति फिर से मनुष्य योनि में आ जाएगा। इसके बाद ललिता ने विधिपूर्वक व्रत किया और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। इस व्रत के पुण्य से ललित श्राप से मुक्त हो गया और मनुष्य योनि की प्राप्ति हुई।
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ऐसे करें भगवान विष्णु को प्रसन्न
इस दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें। देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। इस दौरान सच्चे मन से व्रत कथा का पाठ करें। आखिरी में फल और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से श्रीहरि प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
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