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    प्रेमानंद महाराज से जानिए जॉब करने वाले लोग एकादशी का व्रत कैसे रखें?

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 08:00 AM (GMT+05:30)

    प्रेमानंद महाराज ने देवशयनी एकादशी व्रत के नियमों पर प्रकाश डाला, खासकर नौकरीपेशा लोगों के लिए। उन्होंने बताया कि व्रत का अर्थ कष्ट सहना और प्रभु भक्त ...और पढ़ें

    एकादशी का व्रत विधि पूर्वक कैसे रखना चाहिए? (Picture Credits - AI Images)

    एकादशी का व्रत विधि पूर्वक कैसे रखना चाहिए? (Picture Credits - AI Images)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज यानी 25 जुलाई 2026, शनिवार के दिन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी 'देवशयनी एकादशी' का व्रत है। वर्ष भर में आने वाले 24 एकादशियों का अलग महत्व होता है।

    प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि, अगर किसी व्यक्ति को एकादशी व्रत का पूर्ण फल चाहिए तो उसे पूजा-पाठ के अलावा कुछ खास नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। उनके मुताबिक इन नियमों का पालन एकादशी तिथि से एक दिन पहले यानी द्वादशी या दशमी तिथि पर भी करना चाहिए।

    प्रेमानंद महाराज जी से एक भक्त ने एकांतिक वार्तालाप के दौरान पूछा कि, एकादशी के व्रत को संपूर्ण करने के लिए किन चीजों से दूर रहना चाहिए और इस व्रत को रखने के नियम क्या हैं?

    एकादशी व्रत को रखने का सही तरीका?

    प्रेमानंद महाराज जी के अनुसार, जो भी भक्त एकादशी तिथि का पालन करता है, वह परम शरणागति को प्राप्त होता है। एकादशी तिथि से एक दिन पहले दशमी तिथि पर साधक को एक समय का भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।

    इसके बाद एकादशी तिथि के दिन जल या निर्जल या ज्यादा से ज्यादा एक फल ही खाना चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि, एकादशी तिथि व्रत के दौरान कोशिश करनी चाहिए कि जल ही ग्रहण करें। 24 घंटे प्रभु की भक्ति जल या निर्जल रहकर करनी चाहिए। इससे शरीर शुद्ध होने के साथ आंतों को भी विश्राम मिलता है।

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    जॉब करने वाले लोग कैसे रखें एकादशी का व्रत

    प्रेमानंद महाराज जी के अनुसार, जो भी लोग कार्य की वजह से काफी व्यस्त या दिन भर बाहर रहते हैं, या किसी भी तरह की जॉब करते हैं, और बिना खाए कार्य करना मुश्किल है, उन्हें दो-चार केला ही ग्रहण करना चाहिए।

    प्रेमानंद महाराज जी ने एकादशी व्रत का असल मतलब समझाते हुए कहा कि, व्रत का मतलब यह नहीं कि, सिंघाड़े के आटे की पूरी, कचौड़ी, हलवा, समा चावल की खीर खाकर उसे व्रत का नाम दिया जाए। व्रत का असल मतलब कष्ट सहना होता है। व्रत के जरिए जानबूझकर कष्ट सहा जाता है प्रभु के लिए, पूरे दिन भजन-कीर्तन, नाम जप करो और शाम को एक वक्त फलाहार करना चाहिए।

    प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि, एकादशी व्रत के दिन पूरी रात जागरण करना चाहिए, तभी यह व्रत सफल माना जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।