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कामिका के बाद अब सावन की दूसरी एकादशी 2026 कब है? नोट कर लें सही तारीख और जरूरी नियम

Published: Thu, 13 Aug 2026 03:15 PM (IST)

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण का समय जानें। संतान सुख और उनकी ...और पढ़ें

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त (AI-Generated Image)

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में एकादशी तिथियों का बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। सालभर में आने वाली सभी एकादशियों में भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग विधान बताए गए हैं। इनमें से सावन महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली 'पुत्रदा एकादशी' का महत्व बहुत खास होता है।

जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, यह व्रत मुख्य रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए बेहद फलदायी माना गया है। इसके अलावा, जिन लोगों के बच्चे हैं, वो लोग अपनी संतान की लंबी उम्र, बेहतर स्वास्थ्य और उनके जीवन की तरक्की के लिए यह व्रत रखते हैं।

सावन पुत्रदा एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 (रविवार) को तड़के सुबह 02:00 बजे शुरू हो जाएगी। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 24 अगस्त 2026 (सोमवार) को सुबह 04:18 बजे होगा।

उदया तिथि की धार्मिक परंपरा के अनुसार, सावन पुत्रदा एकादशी का मुख्य व्रत 23 अगस्त 2026, रविवार को ही रखा जाएगा।

भगवान विष्णु की पूजा का उत्तम समय

इस पावन दिन पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना की जाती है। एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, साफ-सुथरे वस्त्र पहनें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

पूजा का शुभ मुहूर्त: 23 अगस्त को सुबह 07:32 बजे से लेकर दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा।

पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले रंग के फूल, पीले वस्त्र, मौसमी फल, रोली और तुलसी दल जरूर चढ़ाएं। मान्यताओं के अनुसार, श्री हरि को तुलसी बेहद प्रिय है और बिना तुलसी के वे किसी भी भोग को स्वीकार नहीं करते हैं।

व्रत पारण का सही समय

किसी भी एकादशी व्रत का पूरा और अक्षय फल तभी मिलता है जब उसका पारण शास्त्रों में बताए गए सही समय पर किया जाए।

पारण की तारीख: 24 अगस्त 2026 (सोमवार)

पारण का शुभ समय: दोपहर 01:41 बजे से शाम 04:16 बजे तक।

व्रत के दौरान इन बातों का रखें ध्यान 

  • एकादशी व्रत के नियम एक दिन पहले यानी दशमी की रात से ही शुरू हो जाते हैं। इसलिए दशमी की शाम से ही सात्विक भोजन करें।
  • व्रत वाले दिन अपने मन में कोई भी नकारात्मक विचार न लाएं और भगवान विष्णु के नाम या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करते रहें।
  • द्वादशी के दिन व्रत खोलने से पहले किसी गरीब, जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को अन्न-जल का दान जरूर करें। इससे व्रत का संपूर्ण फल मिलता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।