योगिनी एकादशी व्रत 2026: एक व्रत से 88,000 ब्राह्मणों की सेवा का मिलता है फल, जानें पूजा विधि, मंत्र, दान, कथा और पारण का समय
योगिनी एकादशी 2026 का व्रत 10 जुलाई को रखा जाएगा, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने, पापों का नाश ...और पढ़ें

योगिनी एकादशी 2026 संपूर्ण गाइड

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। सभी एकादशी व्रत की ही तरह योगिनी एकादशी का भी अपना धार्मिक महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
इस व्रत को लेकर मान्यता है कि, सभी एकादशी में से सिर्फ योगिनी एकादशी को करने मात्र से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल की प्राप्ति होती है। इस साल यह व्रत 10 जुलाई 2026, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा। आइए जानते हैं योगिनी एकादशी की पूजा विधि, मंत्र, दान, कथा, पारण का समय, आरती और भोग के बारे में।
योगिनी एकादशी 2026 की तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई 2026, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा। इस व्रत की शुरुआत 10 जुलाई को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर है। वही एकादशी तिथि का समापन अगले दिन यानी 11 जुलाई 2026 शनिवार सुबह 5 बजकर 22 पर होगी।
उदयातिथि के हिसाब से योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई शुक्रवार के दिन रखा जाएगा। इसके साथ ही इस व्रत का पारण अगले दिन यानी शनिवार को खोला जाएगा।
हिंदू धर्म में योगिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
हिंदू धर्म में योगिनी एकादशी का अत्यंत महत्व है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में उल्लेख देखने को मिलता है कि, इस एकादशी को समस्त पापों का नाश करने वाली और अपार फल प्रदान करने वाली माना जाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में योगिनी एकादशी को लेकर कहा गया है कि-
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अष्टाशीतिसहस्राणि द्विजान् भोजयते तु यः ।
तत्फलं समवाप्नोति योगिनीव्रतकृन्नरः ॥
अर्थात्- जो इस दिन व्रत का पालन करता है, उसे 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल प्रदान होता है।
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योगिनी एकादशी 2026 पूजा विधि
योगिनी एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नहाने के बाद साफ कपड़े पहनें। व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद पूजा घर को साफ कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।
पूजा के दौरान धूप, दीप, नैवेद्य, पीले फूल, पीले भोग और मौसमी फलों को अर्पण करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने दीपक जलाएं और आरती करें।
इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने के साथ एकादशी व्रत की कथा को सुनें।
अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल या फलाहार रहकर व्रत का पालन करें। रात में भगवान विष्णु के नाम का जागरण कर भजन, कीर्तन और नाम जाप करना बेहद शुभ माना जाता है।
योगिनी एकादशी 2026 की कथा
महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को आषाढ़ कृष्ण माह योगिनी एकादशी की कथा सुनाई। अलकापुरी के राजा कुबेर शिव के परम भक्त थे। उनका सेवक हेम माली रोजाना पूजा के लिए फूल लाता था। एक दिन पत्नी प्रेम में लिप्त होने के कारण फूल लाने में देरी कर दी। गुस्साए कुबेर ने उसे पत्नी-वियोग और कोढ़ी होने का श्राप दे दिया।
मृत्युलोक में कोढ़ से तड़पते हुए वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में पहुंचा। ऋषि के कहने पर उसने विधिपूर्वक योगिनी एकादशी व्रत का पालन किया। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उसका कोढ़ सही हो गया और वह फिर से असली रूप पाकर पत्नी के साथ सुखी से रहने लगा। इस व्रत को करने से पाप नष्ट होने के साथ मनुष्य को मुक्ति प्राप्त होती है।
योगिनी एकादशी 2026 दान
योगिनी एकादशी के दिन कुछ खास वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसमें अन्न, अनाज, फल, मिठाई, पानी से भरा मटका और जरूरतमंदों को खाना खिलाना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
योगिनी एकादशी 2026 भोग
भगवान विष्णु को पवित्र और सात्विक भोजन काफी पसंद है। इसलिए योगिनी एकादशी के मौके पर उन्हें पंचामृत, तुलसी दल, मखाने से बनी खीर, दूध, दही, घी, मक्खन, शहद और मौसमी फलों का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
योगिनी एकादशी 2026 पर क्या काम नहीं करना चाहिए?
- इस दिन भूलकर भी तुलसी दल नहीं तोड़ना चाहिए।
- तामसिक भोजन या नशीली चीजों से दूर रहना चाहिए।
- किसी से भी वाद-विवाद या गुस्सा करने से बचना चाहिए।
- दिन में सोना नहीं चाहिए।
योगिनी एकादशी 2026 आरती
ऊं जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ऊं जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ऊं जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ऊं जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ऊं जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ऊं जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ऊं जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ऊं जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ऊं जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ऊं जय जगदीश हरे।
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