Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Ashlesha Nakshatra: क्या आप भी हैं 'सर्प नक्षत्र' के जातक? जानें क्यों आपसे जीत पाना है नामुमकिन

    Updated: Tue, 27 Jan 2026 04:45 PM (IST)

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अश्लेषा नक्षत्र (जिसे 'सर्प नक्षत्र' भी कहते हैं) के स्वामी बुध देव हैं। इस नक्षत्र में जन्मे लोगों का स्वभाव बेहद रहस्यमयी ...और पढ़ें

    अश्लेषा नक्षत्र में जन्में लोगों का व्यक्तित्व (Image Source: AI-Generated)

    अश्लेषा नक्षत्र में जन्में लोगों का व्यक्तित्व (Image Source: AI-Generated)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नक्षत्रों का हमारे स्वभाव और भाग्य पर गहरा असर पड़ता है। कुल 27 नक्षत्रों होते हैं, जिनमें से 9वां नक्षत्र है 'अश्लेषा' (Ashlesha Nakshatra)। इसे 'सर्प नक्षत्र' के नाम से भी जाना जाता है। इसके स्वामी स्वयं बुध देव हैं। अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे लोग काफी रहस्यमयी स्वभाव के होते हैं।

    कैसा होता है इनका स्वभाव?

    अश्लेषा नक्षत्र के जातकों का व्यक्तित्व काफी चुंबकीय होता है। ये लोग दिखने में बेहद आकर्षक होते हैं और अपनी बातों से किसी को भी प्रभावित कर सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस नक्षत्र के लोग काफी चालाक और कूटनीतिज्ञ (Diplomatic) होते हैं। ये किसी भी स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ने की कला बखूबी जानते हैं।

    बुद्धिमत्ता और कार्यक्षेत्र

    इस नक्षत्र के स्वामी बुध (Mercury) हैं, इसलिए इनकी तर्कशक्ति और समझ बहुत तेज होती है। ये बिजनेस, राजनीति और वकालत जैसे क्षेत्रों में काफी नाम कमाते हैं। हालांकि, इनमें थोड़ा जिद्दीपन भी होता है, जो कभी-कभी इनके करियर में बाधा बन जाता है।

    Ashlesha

    (Image Source: AI-Generated)

    इनका पारिवारिक और वैवाहिक जीवन

    अश्लेषा नक्षत्र के लोग अपने परिवार के प्रति काफी समर्पित होते हैं, लेकिन इनका स्वभाव थोड़ा शंकालु (Suspicious) हो सकता है। ये लोग हर किसी पर बहुत जल्दी भरोसा नहीं करते। मान्यताओं के अनुसार, इनके वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं क्योंकि ये अपनी स्वतंत्रता से समझौता करना पसंद नहीं करते।

    खबरें और भी

    इनके लिए सावधानी और कुछ उपाय

    अश्लेषा नक्षत्र को 'गंडमूल' नक्षत्रों की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए, इस नक्षत्र में जन्म लेने पर शांति पूजा कराने की सलाह दी जाती है। इन लोगों को अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए और दूसरों की मदद करने के लिए तत्पर रहना चाहिए।

    यह भी पढ़ें- आपका बच्चा भी गंडमूल नक्षत्र में जन्मा है? क्यों 27 दिनों तक पिता नहीं देख सकते बच्चे की सूरत

    यह भी पढ़ें- राजा दशरथ के साहस से प्रसन्न हुए थे शनि देव, इस तरह टला रोहिणी नक्षत्र का संकट

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।