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    राहु फंसाता है मोह में, तो केतु दिलाता है मोक्ष! जानिए ज्योतिष का सबसे बड़ा रहस्य

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 10:32 AM (IST)

    ज्योतिष शास्त्र में केतु को राक्षस ग्रह क्यों कहा जाता है? जानिए समुद्र मंथन की कथा और केतु के आध्यात्मिक रहस्य, जो इसे वैराग्य और मोक्ष का कारक बनाते ...और पढ़ें

    राक्षस होकर भी मोक्ष का कारक कैसे है केतु? (AI-Generated Image)

    राक्षस होकर भी मोक्ष का कारक कैसे है केतु? (AI-Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का हमारे जीवन पर गहरा असर होता है। जहाँ राहु को भोग, मोह और सांसारिक इच्छाओं का प्रतीक माना जाता है, वहीं केतु इसके बिल्कुल विपरीत काम करता है। केतु को त्याग, वैराग्य और मोक्ष (मुक्ति) का कारक कहा गया है।

    ज्योतिष में केतु एक छाया ग्रह है। यह भले ही रहस्यमयी और अप्रत्याशित परिणाम देता है, लेकिन अंततः आत्मा को सत्य की राह दिखाता है। अब सवाल यह उठता है कि जब केतु की उत्पत्ति एक राक्षस से हुई है, तो वह मोक्ष कैसे दिला सकता है? आइए इसे पौराणिक कथा और ज्योतिष के नजरिए से आसान भाषा में समझते हैं।

    कैसे हुआ केतु का जन्म?

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब देवताओं को अमृत बांटा जा रहा था, तब स्वर्भानु नाम का एक दैत्य रूप बदलकर देवताओं की लाइन में बैठ गया। उसने छल से अमृत पी लिया। जब भगवान विष्णु को इस बात का पता चला, तो उन्होंने तुरंत अपने सुदर्शन चक्र से उस दैत्य का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन, अमृत पीने के कारण वह मरा नहीं। उसका सिर वाला हिस्सा 'राहु' कहलाया और धड़ वाला हिस्सा 'केतु' बन गया। चूंकि, केतु का जन्म एक दैत्य से हुआ, इसलिए उसे "राक्षस ग्रह" कहा जाता है।

    राक्षस होकर भी मोक्ष का कारक कैसे?

    केतु का राक्षस होना सिर्फ भौतिकता और भ्रम का प्रतीक है। उसने अमृत चखा था, इसलिए उसमें दैवीय और आध्यात्मिक गुण भी आ गए। केतु हमें हमारे पिछले जन्मों के कर्मों का फल देता है और उनसे सीखने का मौका भी।

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    ज्योतिष के अनुसार, कुंडली के जिस भी भाव में केतु बैठता है, वह इंसान को उस भाव से जुड़े भौतिक सुखों से दूर कर देता है। शुरुआत में केतु जीवन में मुश्किलें जरूर देता है, लेकिन इन्हीं संघर्षों से हमारी आत्मा परिपक्व और मजबूत होती है। यही अलगाव और परेशानियां हमें वैराग्य की ओर ले जाती हैं, जो मोक्ष की पहली सीढ़ी है।

    केतु हमें सिखाता है कि सब कुछ पा लेने के बाद भी सच्ची शांति भौतिक चीजों में नहीं है। बाहरी दुनिया अस्थायी है और असली खुशी भीतर है। वह आत्मा को अज्ञानता के अंधेरे से निकालकर सत्य की ओर ले जाता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु शुभ स्थिति में होता है, तो वह भीतर से गहरा वैरागी बन जाता है। उसे जीवन की सच्चाई का बोध हो जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।