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    देवभूमि के 5 रहस्यमयी मंदिर: कहीं होती है आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा, तो कहीं छिपा है प्रलय का राज!

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 02:30 PM (GMT+05:30)

    उत्तराखंड में कई प्राचीन मंदिर हैं, लेकिन कुछ ऐसे रहस्यमयी मंदिर भी हैं जिनके बारे में कम लोग जानते हैं। यह लेख ऐसे ही 5 मंदिरों की परंपराओं और रहस्यो ...और पढ़ें

    उत्तराखंड के 5 रहस्यमयी मंदिर जिसका सच आपको हैरान कर देगा

    उत्तराखंड के 5 रहस्यमयी मंदिर जिसका सच आपको हैरान कर देगा

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उत्तराखंड जिसे देवताओं की भूमि के नाम से जाना जाता है। यहां कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं जिनका जिक्र धार्मिक ग्रंथों में देखने को मिलता है। इनमें केदारनाथ से लेकर गंगोत्री, यमुनोत्री, तुंगनाथ और जागेश्वर धाम जैसे प्रमुख मंदिर हैं, जिनके बारे में अधिकतर लोगों को पता है।

    लेकिन आज हम उत्तराखंड के उन 5 रहस्यमयी मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को ही पता है। इन मंदिरों से जुड़ी परंपराओं और उसके पीछे का रहस्य हर किसी को हैरत में डाल देता है।

    महासू देवता मंदिर

    महासू देवता मंदिर

    उत्तराखंड के उत्तरकाशी के हनोल क्षेत्र में टोंस नदी के किनारे पर बसा है महासू देवता का मंदिर, जो देवताओं के सामूहिक नाम पर आधारित है। महासू देवता की पूजा उत्तराखंड के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश में भी होती है।

    महासू देवता को न्याय का देवता भी माना जाता है और उनके मंदिर को न्यायालय के तौर पर देखा जाता है। देशभर से श्रद्धालु इस मंदिर में न्याय की पाने की प्रार्थना के लिए आते हैं।

    लातु देवता मंदिर

    लाटू देवता मंदिर

    उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है लाटू देवता का मंदिर है। स्थानीय लोगों का मानना है कि, लाटू देवता उत्तराखंड की नंदा देवी के धर्म भाई हैं। इस मंदिर के कपाट साल में एक बार खुलते हैं। इस दिन मंदिर के पुजारी आंखों और मुंह पर पट्टी बांधकर पूजा करते हैं।

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    इसके अलावा भक्त भी देवता के दर्शन दूर से ही करते हैं। इसके पीछे लोगों का मानना है कि, मंदिर में नागदेवता मणि के साथ रहते हैं, जिसे देख पाना आम लोगों के लिए आसान नहीं है। पुजारी नागराज के रूप को देखकर डर न जाए इसलिए वे अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर दरवाजा खोलते हैं।

    भविष्य बद्री

    भविष्य बद्री

    उत्तराखंड का अत्यंत पवित्र मंदिर भविष्य बद्री को भविष्य का बद्रीनाथ भी कहा जाता है, जो चमोली जिले के जोशीमठ से करीब 17 किलोमीटर दूर सुभैन गांव में बसा है। उत्तराखंड के इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि, जब कलियुग के अंत में बद्रीनाथ का मार्ग बंद हो जाएगा और यात्रा दुर्गम बन जाएगी, तब भगवान बद्री इस स्थान पर निवास करेंगे। उस समय से यह स्थान भक्तों के लिए पूजा का अहम स्थल होगा।

    पाताल भुवनेश्वर

    पाताल भुवनेश्वर

    उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है पाताल भुवनेश्वर जिसे हिंदू धर्म के प्रमुख आस्था स्थलों में शामिल किया जाता है। स्कंद पुराण जैसे पौराणिक ग्रंथों में भी इसका जिक्र देखने को मिलता है। पाताल भुवनेश्वर करीब 90 फीट गहरी इस प्राकृतिक गुफा तक जाने के लिए करीब 80 संकरी और फिसलन भरी सीढ़ियां उतरनी पढ़ती हैं।

    गुफा के अंदर 6 प्राकृतिक स्तंभों में से 4 स्तंभों को सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग कहा गया है। जिसमें माना जाता है कि, कलियुग का स्तंभ धीरे-धीरे बढ़ रहा है और इसके ठीक ऊपर छत से लटकी हुए प्राकृतिक शिला जिसे लेकर कहा जाता है कि, जिस दिन ये शिला और स्तंभ आपस में मिल जाएंगे, उस दिन प्रलय आ जाएगा। हालांकि यह बाते पूरी तरह से धार्मिक और प्रचलित मान्यताओं पर आधारित हैं।

    टिम्मरसैंण महादेव

    टिमरसैंण महादेव यात्रा

    उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक गुफा जिसे टिम्मरसैंण महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का मुख्य आकर्षण गुफा के अंदर प्राकृतिक रूप से स्थापित शिवलिंग है। इसे स्थानीय भक्त बाबा बर्फानी भी बुलाते हैं।

    क्योंकि इस मंदिर में पूरे वर्ष ठंड का प्रभाव रहता है और सर्दियों के मौसम में गुफा के अंदर बर्फ की परत जम जाती है। यह परत देखते ही देखते प्राकृतिक शिवलिंग का आकार ले लेती है, जो दिखने में एकदम अमरनाथ गुफा की तरह दिखाई देती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।