उत्तराखंड का वो रहस्यमयी शिव मंदिर, जहां शिवलिंग की नहीं बल्कि होती है महादेव की जटाओं की पूजा
उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित कल्पेश्वर मंदिर एक अनोखा शिव धाम है, जहां भगवान शिव के पारंपरिक शिवलिंग की बजाय उनकी जटाओं की पूजा की जाती है। ...और पढ़ें
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कल्पेश्वर मंदिर का ऋषि दुर्वासा से है संबंध
HighLights
कल्पेश्वर मंदिर में होती है शिव की जटाओं की पूजा।
यह उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित पंचकेदार का हिस्सा।
ऋषि दुर्वासा ने यहीं की थी तपस्या, साल भर खुला रहता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस महीने में भक्त महादेव के दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं। इस दौरान मंदिरों में खास रौनक देखने को मिलती है। वैसे तो सभी सभी मंदिरों का अधिक महत्व है।
लेकिन भगवान शिव को समर्पित एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान शिव की जटाओं की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस मंदिर का नाम कल्पेश्वर मंदिर है। यह मंदिर उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इस मंदिर से जुड़ी खास बातों के बारे में।
कल्पेश्वर मंदिर
कल्पेश्वर मंदिर लगभग 2,200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह एक ऐसा मंदिर है, जो हर मौसम में खुला रहता है। कल्पेश्वर मंदिर महादेव की जटाओं को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिस जगह पर कल्पेश्वर मंदिर है। उसी जगह पर प्राचीन समय में ऋषि दुर्वासा ने तपस्या की थी। जिससे इस पवित्र जगह को एक शक्तिशाली आध्यात्मिक ऊर्जा मिली। ऐसा कहा जाता है कि जब इस जगह पर ऋषि दुर्वासा ने तपस्या की थी। तभी से यह स्थान कल्पेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
कल्पेश्वर मंदिर की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध खत्म होने के बाद पांडव ब्रह्म हत्या के पाप से छुटकारा पाने के लिए भगवान शिव की खोज के लिए निकले थे, लेकिन पांडव से शिव जी नाराज थे। इसी वजह से शिव जी ने नंदी का रूप धारण किया।
इसके बाद जब भीम ने बैल को पकड़ने की कोशिस की, तो वह धरती में समाने लगे। तब बैल के रूप में महादेव के अंग 5 अलग-अलग जगहों पर प्रकट हुए, जिन्हें पंचकेदार के नाम से जाना जाता है। कल्पेश्वर में शिव जी सिर के बाल यानी जटाएं प्रकट हुई थीं। इसलिए इस मंदिर में महादेव के बालों की पूजा-अर्चना होती है। कल्पेश्वर मंदिर में एक प्राकृतिक गुफा है, जहां शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अहसास होता है।
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Temple source- kalpeshwar temple
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