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    बरसों से सूनी है गोद? तो जरूर करें हरिद्वार के पहाड़ों पर स्थित मां मनसा देवी मंदिर के दर्शन

    Updated: Mon, 13 Apr 2026 12:52 PM (IST)

    हरिद्वार के बिल्व पर्वत पर स्थित मनसा देवी मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। राजा गोपाल सिंह द्वारा वर्ष 1811-1815 के बीच निर्मित इस मंदिर से गहरी ध ...और पढ़ें

    क्या है मनसा देवी मंदिर की मान्यता? (Pic Credit- Instagram)

    क्या है मनसा देवी मंदिर की मान्यता? (Pic Credit- Instagram)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उत्तराखंड में देवी-देवताओं के कई मंदिर हैं, जिनमें हरिद्वार के बिल्व पर्वत पर स्थित मां मनसा देवी मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। मंदिर से जुड़ी कई गहरी धार्मिक मान्यताएं हैं।

    धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु मां मनसा देवी के दर्शन करता है। उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। किसी खास अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं मनसा देवी मंदिर (Mansa Devi Temple) का इतिहास और धार्मिक मान्यता।

    maa mansa devi temple (1)

    (Pic Credit- Instagram)

    मनसा देवी मंदिर का इतिहास (Mansa Devi Temple History)

    मंदिर का निर्माण राजा गोपाल सिंह के द्वारा वर्ष 1811 से 1815 के बीच करवाया गया था। मनसा देवी मंदिर उन जगहों में शामिल है, जहां समुद्र मंथन के दौरान अमृत की कुछ बूंदें यहां पर गिरी थी। मंदिर में मनसा देवी की दो मूर्तियां स्थापित हैं। एक मूर्ति के तीन मुख और पांच भुजाएं हैं और दूसरी मूर्ति की आठ भुजाएं हैं और देवी सर्प पर विराजमान हैं।

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    मनसा देवी मंदिर की मान्यता

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां मनसा देवी दरबार में आने वाले श्रद्धालु की मनोकामना पूरी करती हैं। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से दरबार में आने वाला भक्त कभी भी खाली हाथ नहीं लौटता। इसके अलावा मनसा देवी मंदिर में आने से लोगों को संतान की प्राप्ति होती है। सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा और पति की लंबी उम्र के लिए मां मनसा देवी से प्रार्थना करती हैं।

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    Source- Government of Uttarakhand 

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।