अष्टमी पूजा में रह गई है कोई चूक? रात में करें ये दिव्य पाठ, अधूरी पूजा भी देगी पूरा फल
आज यानी 26 मार्च को चैत्र नवरात्र की दुर्गाष्टमी मनाई जा रही है, जो माता रानी की कृपा प्राप्ति के लिए विशेष महत्व रखती है। ...और पढ़ें

durga ashtami 2026 (AI Generated Image)
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हिंदू धर्म में खास महत्व रखते हैं चैत्र नवरात्र
नौ दिनों में होती है माता रानी की पूजा
26 मार्च को मनाई जा रही है दुर्गाष्टमी
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र में 9 दिनों की पावन अवधि में विधि-विधान से माता रानी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा व व्रत किया जाता है। आज यानी 26 मार्च को चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि है, जिसे दुर्गाष्टमी (durga ashtami 2026) के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पर देव्यपराधक्षमापण स्तोत्रम् का पाठ जरूर करें ताकि आपको पूजा का पूर्ण लाभ प्राप्त हो।
अथ देव्यपराधक्षमापणस्तोत्रम् (Na Mantram No Yantram Stotram)
न मत्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो, न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथाः ।
न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं, परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ।।१।।
विधेरज्ञानेन द्रविणविरहेणालसतया, विधेयाशक्यत्वात्तव चरणयोर्या च्युतिरभूत् ।
तदेतत् क्षन्तव्यं जननि सकलोद्धारिणि शिवे, कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ।।२।।
पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहवः सन्ति सरलाः, परं तेषां मध्ये विरलतरलोऽहं तव सुतः ।
मदीयोऽयं त्यागः समुचितमिदं नो तव शिवे, कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ।।३।।
जगन्मातर्मातस्तव चरणसेवा न रचिता, न वा दत्तं देवि द्रविणमपि भूयस्तव मया ।
तथापि त्वं स्नेहं मयि निरुपमं यत्प्रकुरुषे, कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ।।४।।
परित्यक्ता देवा विविधविधसेवाकुलतया, मया पञ्चाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि ।
इदानीं चेन्मातस्तव यदि कृपा नापि भविता, निरालम्बो लम्बोदरजननि कं यामि शरणम् ।।५।।
श्वपाको जल्पाको भवति मधुपाकोपमगिरा, निरातङ्को रङ्को विहरति चिरं कोटिकनकैः ।
तवापर्णे कर्णे विशति मनुवर्णे फलमिदं, जनः को जानीते जननि जपनीयं जपविधौ ।।६।।
चिताभस्मालेपो गरलमशनं दिक्पटधरो, जटाधारी कण्ठे भुजगपतिहारी पशुपतिः ।
कपाली भूतेशो भजति जगदीशैकपदवीं, भवानि त्वत्पाणिग्रहणपरिपाटीफलमिदम् ।।७।।
न मोक्षस्याकाङ्क्षा भवविभववाञ्छापि च न मे, न विज्ञानापेक्षा शशिमुखि सुखेच्छापि न पुनः ।
अतस्त्वां संयाचे जननि जननं यातु मम वै, मृडानी रुद्राणी शिव शिव भवानीति जपतः ।।८।।
नाराधितासि विधिना विविधोपचारैः, किं रुक्षचिन्तनपरैर्न कृतं वचोभिः ।
श्यामे त्वमेव यदि किञ्चन मय्यनाथे, धत्से कृपामुचितमम्ब परं तवैव ।।९।।
आपत्सु मग्नः स्मरणं त्वदीयं, करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि ।
नैतच्छठत्वं मम भावयेथाः, क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति ।।१०।।
जगदम्ब विचित्रमत्र किं, परिपूर्णा करुणास्ति चेन्मयि ।
अपराधपरम्परापरं, न हि माता समुपेक्षते सुतम् ।।११।।
मत्समः पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि, एवं ज्ञात्वा महादेवि यथायोग्यं तथा कुरु ।।१२।।
इति श्रीशङ्कराचार्यविरचितं देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

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मिलता है ये लाभ
अगर आपको लगे कि आपसे मां दुर्गा की पूजा में कोई चूंक रह गई है या फिर कोई भूल हो गई है, तो ऐसे में आप दुर्गाष्टमी की रात में इस दिव्य स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। इससे देवी प्रसन्न होती हैं और साधक को भूल को क्षमा कर पूजा का पूर्ण फल प्रदान करती हैं।
इस तरह करें पाठ
- देव्यपराधक्षमापण स्तोत्रम् का पाठ रात में 9 से 11 के बीच करना चाहिए।
- सबसे पहले एक लाल रंग का ऊनी आसन बिछाकर उसपर बैठ जाएं।
- पाठ के दौरान पूर्व दिशा की ओर मुख रखें।
- देव्यपराधक्षमापण स्तोत्रम् का पाठ कम-से-कम 1, 3 या फिर 5 बार करना चाहिए।
- अंत में मां दुर्गा की आरती करें।
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