चैत्र नवरात्र पर दूर करें असमंजस, जानें कब होगा अष्टमी और नवमी पूजन?
चैत्र नवरात्र में दुर्गाष्टमी आज (गुरुवार) मनाई जा रही है, जबकि महानवमी का पूजन शुक्रवार सुबह 10 बजे से पहले होगा। आचार्यों ने उदया तिथि और कर्मकाल के ...और पढ़ें

रामनवमी स्मार्त परंपरा में आज, वैष्णव परंपरा में कल मनाई जाएगी। प्रतीकात्मक

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, देहरादून। रामनवमी स्मार्त परंपरा में आज, वैष्णव परंपरा में कल मनाई जाएगी चैत्र नवरात्र के अंतिम चरण में दुर्गाष्टमी, महानवमी और रामनवमी की तिथियों को लेकर श्रद्धालुओं में बना असमंजस अब काफी हद तक स्पष्ट हो गया है।
आचार्यों के अनुसार इस बार पर्वों का निर्णय केवल तिथि से नहीं, बल्कि उदया तिथि, कर्मकाल और परंपरा के आधार पर किया जाना चाहिए। इसी कारण अष्टमी आज गुरुवार को मानी जा रही है, जबकि नवमी पूजन शुक्रवार को सुबह 10 बजे से पहले किया जाएगा।
यह है मुहूर्त
आचार्य पवन पाठक के अनुसार अष्टमी तिथि बुधवार दोपहर एक बजकर 51 मिनट से प्रारंभ होकर गुरुवार प्रातः 11 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि विद्यमान होने के कारण दुर्गाष्टमी का पूजन आज ही मान्य है। उन्होंने बताया कि अष्टमी पूजन और कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को 11 बजकर 49 मिनट से पहले पूजन संपन्न कर लेना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य आचार्य सुशांत राज ने बताया कि अष्टमी के बाद नवमी तिथि गुरुवार 11 बजकर 50 मिनट से आरंभ होकर शुक्रवार प्रातः 10 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि शुक्रवार को नवमी होने के कारण महानवमी, दुर्गा नवमी और नवमी का कन्या पूजन शुक्रवार को किया जाएगा।
उत्तराखंड विद्वत सभा के प्रवक्ता विपिन डोभाल के अनुसार नवमी पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को शुक्रवार सुबह 10 बजकर 08 मिनट से पहले कन्या पूजन कर लेना चाहिए, क्योंकि इसके बाद दशमी तिथि आरंभ हो जाएगी।
ज्योतिषाचार्य डा. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में सूर्योदय के समय की तिथि को विशेष महत्व दिया गया है। इसी कारण अष्टमी और नवमी दोनों पर्वों में उदया तिथि का ध्यान रखा जाता है। रामनवमी को लेकर भी अलग स्थिति बनी हुई है।
आचार्य पवन पाठक के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म मध्याह्न काल में माना जाता है, इसलिए मध्याह्न व्यापिनी नवमी के आधार पर स्मार्त और सामान्य गृहस्थजन गुरुवार को रामनवमी व्रत करेंगे। वहीं वैष्णव परंपरा में अष्टमी रहित नवमी, उदयकाल और पुनर्वसु नक्षत्र का विचार होने से वैष्णव श्रद्धालु शुक्रवार को रामनवमी मनाएंगे।
कन्या पूजन के लिए दोनों दिन अलग समय
अष्टमी मानने वाले श्रद्धालु गुरुवार को प्रात: 11:49 बजे से पहले, जबकि नवमी मानने वाले शुक्रवार सुबह 10:08 बजे से पहले कन्या पूजन करें। स्मार्त परंपरा में मध्याह्न नवमी को महत्व, जबकि वैष्णव परंपरा में उदया तिथि और नक्षत्र को प्राथमिकता दी जाती है।
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