Chaitra Navratri 2026 Day 8: यहां पढ़ें पूजा विधि और मंत्र, मां महागौरी की कृपा से पूरी होगी हर मुराद
नवरात्र पर्व की अष्टमी तिथि पर देवी महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे वैवाहिक जीवन सुखी होता है और सौंदर्य व स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

मां महागौरी की पूजा विधि (Picture Credit: Freepik)
HighLights
चैत्र नवरात्र के आठवें दिन होती है मां महागौरी की पूजा
सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देती हैं माता
कई लोग नवरात्र की अष्टमी तिथि पर करते हैं पारण
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र के आठवें दिन पर (Chaitra Navratri 2026 Day 8) विशेष तौर से मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। कई साधक इस दिन पर नवरात्र व्रत का पारण भी करते हैं, ऐसे में नवरात्र की अष्टमी तिथि विशेष महत्व रखती है। चलिए पढ़ते हैं मां महागौरी के स्वरूप से लेकर पूजा विधि तक।
कैसा है मां महागौरी का स्वरूप
मां महागौरी दुर्गा जी का आठवां स्वरूप हैं, जो अत्यंत शांत, सौम्य और गौर वर्ण की हैं। देवी महागौरी के गौर वर्ण के कारण उनकी तुलना शंख, चन्द्रमा और कुन्द के फूल से की जाती है। माता की सवारी बैल (वृषभ) है। उनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से दो में उन्होंने त्रिशूल और डमरू धारण किया हुआ है। देवी महागौरी का एक हाथ अभय में है और दूसरा वर मुद्रा।
मां महागौरी की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं और व्रत का संकल्प लें।
- संभव हो तो सफेद रंग के वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- चौकी बिछाकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- माता को कुमकुम, सिंदूर, रोली और चंदन का तिलक लगाएं।
- मां महागौरी को सफेद फूल जैसे चमेली या रात की रानी अर्पित करें।
- माता को नारियल या नारियल से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
- सरसों के तेल या फिर देसी घी का दीपक जलाएं।
- अंत में घी के दीपक या कपूर से माता की आरती करें।
मां महागौरी के मंत्र -
ॐ देवी महागौर्यै नमः
प्रार्थना मंत्र -
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
स्तुति मंत्र -
या देवी सर्वभूतेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
ध्यान मंत्र -
वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम्॥
पूर्णन्दु निभाम् गौरी सोमचक्रस्थिताम् अष्टमम् महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीयां लावण्यां मृणालां चन्दन गन्धलिप्ताम्॥
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