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    29 जुलाई 2026 को है गुरु पूर्णिमा, नोट करें स्नान से लेकर संकल्प तक गुरु पूजन की संपूर्ण विधि

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 07:00 AM (IST)

    गुरु पूर्णिमा 2026, जो 29 जुलाई को है, पर पूजा विधि इसमें स्वच्छता, गुरु स्थापना, दीप प्रज्वलन, संकल्प, चरण पादुका पूजन, भोग और गुरु मंत्र जाप जैसे मह ...और पढ़ें

    गुरु पूर्णिमा 2026 पर संपूर्ण पूजा विधि के बारे में जानिए

    गुरु पूर्णिमा 2026 पर संपूर्ण पूजा विधि के बारे में जानिए

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा प्राप्त है। इसलिए गुरु पूर्णिमा का दिन सनातन परंपरा में खास महत्व रखता है। यह खास दिन गुरु या माता-पिता के प्रति सच्ची श्रद्धा व सम्मान जाहिर करने के लिए मनाया जाता है। बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि, इस दिन को महर्षि वेदव्यास जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है, इस वजह से इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं।

    इस साल गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई 2026, बुधवार के दिन मनाया जाएगा। गुरु पूर्णिमा के मौके पर अधिकतर लोगों को पता नहीं होता कि, इस दिन किसी विधि-विधान से पूजा की जाती है? आइए जानते हैं गुरु पूर्णिमा 2026 पूजा विधि के बारे में।

    गुरु पूर्णिमा पूजा विधि 2026

    स्नान एवं शुद्धिकरण जरूरी

    गुरु पूर्णिमा के दिन स्वच्छा का खास ध्यान रखें। इस दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नहाने के बाद साफ कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद पूजा कक्ष को गंगाजल से पवित्र करना चाहिए।

    गुरु स्थापना

    गुरु पूर्णिमा के मौके पर जिस भी गुरु के प्रति आपकी आस्था और श्रद्धा है, उनकी तस्वीर या चरण पादुका साफ आसन पर रखकर गुरु की स्थापना करें। इसके लिए आसन पर लाल कपड़ा बिछाकर उसपर चरण पादुका या तस्वीर रखें।

    दीप प्रज्वलन

    गुरु पूर्णिमा के दिन दीप प्रज्वलन का खास महत्व होता है। इस दिन घी के दीपक के साथ धूप-अगरबत्ती जलाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से वातावरण शुद्ध और भक्तिमय हो जाता है।

    संकल्प लेना

    गुरु पूर्णिमा के मौके पर हाथ में जल लेकर गुरु की पूजा का संकल्प लेना शुभ माना जाता है। मन में गुरु का ध्यान करके उनके प्रति समर्पण की भावना रखें। गुरु की पूजा करने से पहले संकल्प लेना बेहद जरूरी है।

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    चारण पादुका पूजन

    संकल्प लेने के बाद एक पात्र में गुरु के चरण रखकर दूध और जल से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद उसे साफ कपड़े से पोंछ कर उसपर चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    भोग अर्पण करें।

    गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा के बाद फल, मिठाई या अन्य मिष्ठान का भोग अर्पित करना चाहिए। इसके बाद श्रद्धा से दक्षिणा अर्पित करने का विधान है।

    गुरु मंत्र का जाप

    गुरु पूर्णिमा के मौके पर अपनी क्षमता अनुसार 11, 21, 51 या 108 बार गुरु से जुड़े किसी भी मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। नीचे दो प्रमुख मंत्र दिए गए हैं।

    'ऊं गुरुवे नम:' और 'त्वमेव माता च पिता त्वमेव,त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥

    गुरु की आरती (बृहस्पति देव की आरती)

    जय बृहस्पति देवा, ऊं जय बृहस्पति देवा ।

    छिन छिन भोग लगा‌ऊं, कदली फल मेवा ॥

    ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

    तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।

    जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥

    ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

    चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।

    सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥

    ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

    तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।

    प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥

    ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

    दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।

    पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥

    ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

    सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।

    विषय विकार मिटा‌ओ, संतन सुखकारी ॥

    ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

    जो को‌ई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।

    जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥

    ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥

    सब बोलो विष्णु भगवान की जय ।

    बोलो बृहस्पतिदेव भगवान की जय ॥

    गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा के साथ-साथ उनका आशीर्वाद लेना ही उतना जरूरी माना गया है। जिनके भी जीवन में गुरु की कृपा बनी रहती है, उनके फैसले सटीक होने के साथ हर काम में सफलता मिलती है।

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