मेष संक्रांति 2026: 'मंगल' की राशि में सूर्य का आगमन, साहस और सफलता के लिए करें ये खास काम
मेष संक्रांति पर सूर्य का मंगल की राशि में प्रवेश जीवन में नई ऊर्जा लेकर आता है। जानें इस दिन का धार्मिक महत्व और कैसे करें अंगारक स्तोत्र का पाठ। ...और पढ़ें

मेष संक्रांति पर करें अंगारक स्तोत्र का पाठ (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में संक्रांति का अर्थ है 'बदलाव'। जब सूर्य देव मीन राशि की अपनी यात्रा पूरी कर मंगल की स्वामित्व वाली मेष राशि में कदम रखते हैं, तो इसे 'मेष संक्रांति' (Mesh Sankranti 2026) कहा जाता है। यह दिन केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा के संचार का दिन है।
मंगल साहस और शक्ति का प्रतीक है, और सूर्य आत्मा और तेज का। जब इन दोनों का प्रभाव मिलता है, तो इंसान के भीतर सोई हुई इच्छाशक्ति जाग उठती है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को राजा और मंगल को सेनापति माना गया है। मेष संक्रांति का सीधा मतलब है कि राजा अपने सबसे भरोसेमंद सेनापति के घर पधारे हैं।
क्यों करें इस स्तोत्र का पाठ?
मेष संक्रांति के पावन अवसर पर अंगारक स्तोत्र का पाठ करना आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जाता है। चूंकि, मेष राशि के स्वामी स्वयं मंगल देव हैं, इसलिए इस विशेष दिन पर उनकी स्तुति करने से मंगल ग्रह की शुभता कई गुना बढ़ जाती है। इस स्तोत्र का जाप न केवल आपके आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि करता है, बल्कि यह कर्ज से मुक्ति, भूमि-संपत्ति से जुड़े विवादों के निपटारे और 'मंगल दोष' के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में भी रामबाण साबित होता है।
।। श्री अंगारक स्तोत्रम् ।। (Angarak Stotram)
अंगारकः शक्तिधरो लोहितांगो धरासुतः।
कुमारो मंगलो भौमो महाकायो धनप्रदः ॥१॥
ऋणहर्ता दृष्टिकर्ता रोगकृत् रोगनाशनः।
विद्युत्प्रभो व्रणकरः कामदो धनहृत् कुजः ॥२॥
सामगानप्रियो रक्तवस्त्रो रक्तायतेक्षणः।
लोहितो रक्तवर्णश्च सर्वकर्मावबोधकः ॥३॥
रक्तमाल्यधरो हेमकुण्डली ग्रहनायकः।
नामान्येतानि भौमस्य यः पठेत् सततं नरः॥४॥
ऋणं तस्य च दौर्भाग्यं दारिद्र्यं च विनश्यति।
धनं प्राप्नोति विपुलं स्त्रियं चैव मनोरमाम् ॥५॥
वंशोद्योतकरं पुत्रं लभते नात्र संशयः,
योऽर्चयेदह्नि भौमस्य मङ्गलं बहुपुष्पकैः।
सर्वं नश्यति पीडा च तस्य ग्रहकृता ध्रुवम् ॥६॥

(Image Source: AI-Generated)
ऋणमोचक मंगल स्तोत्र (Rinmochan Mangal Stotra Path)
मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः।
स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः।।
लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः।
धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः।।
अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः।
व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः।।
एतानि कुजनामनि नित्यं यः श्रद्धया पठेत्।
ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात्।।
धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।
कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम्।।
स्तोत्रमङ्गारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभिः।
न तेषां भौमजा पीडा स्वल्पाऽपि भवति क्वचित्।।
अङ्गारक महाभाग भगवन्भक्तवत्सल।
त्वां नमामि ममाशेषमृणमाशु विनाशय।।
ऋणरोगादिदारिद्रयं ये चान्ये ह्यपमृत्यवः।
भयक्लेशमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा।।
अतिवक्त्र दुरारार्ध्य भोगमुक्त जितात्मनः।
तुष्टो ददासि साम्राज्यं रुश्टो हरसि तत्ख्शणात्।।
विरिंचिशक्रविष्णूनां मनुष्याणां तु का कथा।।
तेन त्वं सर्वसत्त्वेन ग्रहराजो महाबलः।।
पुत्रान्देहि धनं देहि त्वामस्मि शरणं गतः।
ऋणदारिद्रयदुःखेन शत्रूणां च भयात्ततः।।
एभिर्द्वादशभिः श्लोकैर्यः स्तौति च धरासुतम्।
महतिं श्रियमाप्नोति ह्यपरो धनदो युवा।।
।। इति श्री ऋणमोचक मङ्गलस्तोत्रम् सम्पूर्णम्।।
मंगल दोष शांति मंत्र -
1. ॐ धरणीगर्भसंभूतं विद्युतकान्तिसमप्रभम। कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम ।।
2. ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम: ।
3. ॐ अंगारकाय विद्महे शक्ति हस्ताय धीमहि, तन्नो भौमः प्रचोदयात् ।।
4. मंगल के लिए वैदिक मंत्र -
"ॐ अग्निमूर्धादिव: ककुत्पति: पृथिव्यअयम। अपा रेता सिजिन्नवति ।"
5. मंगल गायत्री मंत्र -
"ॐ क्षिति पुत्राय विदमहे लोहितांगाय धीमहि-तन्नो भौम: प्रचोदयात"
6. मंगल के लिए तांत्रोक्त मंत्र -
"ॐ हां हंस: खं ख:"
"ॐ हूं श्रीं मंगलाय नम:"
"ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:"
7. मंगल का नाम मंत्र -
"ॐ अं अंगारकाय नम:"
"ॐ भौं भौमाय नम:"
यह भी पढ़ें- जॉब और बिजनेस में चाहिए तरक्की? तो मेष संक्रांति के दिन राशि अनुसार करें इन चीजों का दान
यह भी पढ़ें- मेष संक्रांति 2026: सूर्य को अर्घ्य देने से बढ़ता है मान-सम्मान, लेकिन जल देते समय न करें ये एक गलती
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।